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नाइजीरिया एड्स की सस्ती दवा बनाएगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नाइजीरिया में एड्स की सस्ती दवाएँ बनाने के लिए पहला संयंत्र लगाया जा रहा है. इसमें नाइजीरिया के लाखों एचआईवी और एड्स से पीड़ित लोगों के लिए एंटी-रेट्रोवायरल दवाएँ बनाई जाएँगी. अमरीका में बसे नाइजीरियाई लोगों ने इस संयंत्र के लिए धनराशि देना स्वीकार किया है. नाइजीरियाई राष्ट्रपति ओलुसेगन ओबसांजो ने विकसित देशों में बसे नाइजीरियाई लोगों से अपील की थी कि वे देश में एड्स पीड़ितों के लिए मदद करें और उसी के जवाब में यह पहल हुई है. इस संयंत्र की स्थापना समारोह में राष्ट्रपति की पत्नी ने इसे "प्रजातंत्र का एक और लाभ" बताया है. चूंकि इस संयंत्र में पैसा लगाने वाले ज़्यादातर लोग चिकित्सा व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, उन्होंने कहा कि यह देशभक्ति और व्यावयायिकता का शक्तिशाली समन्वय है. चालीस हज़ार मौतें रोज़ नाईजीरिया में चालीस लाख लोग एचआईवी और एड्स से पीड़ित हैं और अधिकृत रिकॉर्ड बताते हैं कि हर दिन चालीस हज़ार मरीज़ों की मौत हो रही है. संयंत्र के मुख्य कार्यकारी प्रिंस शिजिओक ओफ़ोमाता का कहना है कि यह संयंत्र अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बनने वाला अत्याधुनिक संयंत्र होगा. उन्होंने कहा कि इस संयंत्र में एंटी-रेट्रोवायरल दवाएँ बनाने का फ़ैसला इसलिए किया गया क्योंकि अफ़्रीका में एचआईवी और एड्स से पीड़ित लोगों की बड़ी संख्या है और दूसरे उनको सस्ती दवाएँ उपलब्ध नहीं हैं. उनका कहना था कि दो साल के भीतर यह संयंत्र अफ़्रीकी देशों को सस्ती दवाएँ उपलब्ध कराने लगेगा. |
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