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'समुचित क़दम नहीं उठाए जा रहे हैं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने दुनिया भर के देशों को चेतावनी दी है कि वे अब भी एड्स को फैलने से रोकने के लिए उतने क़दम नहीं उठा रहे हैं जितने की ज़रूरत है. थाईलैंड में हो रहे पंद्रहवें अंतरराष्ट्रीय एड्स सम्मेलन के उदघाटन के मौक़े पर अन्नान ने कहा कि एड्स को पराजित करने की कुंजी नेतृत्व है और इससे निपटने की ज़िम्मेदारी हर देश में शीर्ष तक जाती है. अन्नान ने ख़ासतौर पर महिलाओं को दी जा रही मदद के तरीक़ों की आलोचना की और कहा कि सारी ज़िम्मेदारी महिलाओं को ही उठानी पड़ रही है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव का एशिया के स्वास्थ्य मंत्रियों और वरिष्ठ राजनेताओं के लिए संदेश बिल्कुल स्पष्ट था कि अगर वे एड्स से निपटने में नाकाम रहते हैं तो उसकी क़ीमत उन्हें ही चुकानी होगी. अन्नान का कहना था कि इससे इस क्षेत्र के देशों की स्वास्थ्य प्रणाली पर काफ़ी बोझ पड़ेगा और आर्थिक के साथ ही सामाजिक विकास के लिए जिन संसाधनों की ज़रूरत है उन पर भी उल्टा असर होगा. अन्नान ने कहा, "हाल के दशकों में अन्य क्षेत्रों के मुक़ाबले एशिया प्रशांत में ज़्यादा लोग ग़रीबी से दूर हुए हैं मगर ध्यान रखना होगा कि ये फ़ायदे आपके हाथ से फिसल भी सकते हैं." उधर संयुक्त राष्ट्र ने एड्स से निपटने के लिए जिस अंतरराष्ट्रीय कोष की स्थापना की थी उसकी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस योजना के पहले चरण की 20 प्रतिशत परियोजनाएँ अपना लक्ष्य पाने में विफल रही हैं और उन्हें आगे धन मुहैया नहीं कराया जाएगा. कोष ने जिन 25 परियोजनाओं के लिए लगभग 16 करोड़ रुपए मुहैया कराए वे स्थानीय राजनीतिक परेशानियों का शिकार हुई हैं. इधर राष्ट्रपति बुश ने एचआईवी-एड्स के लिए बड़ा कोष मुहैया कराने का वादा किया है. विश्व स्तर पर एड्स मामलों के अमरीका के समन्वयक रैंडल टोबियास ने कहा, "हमारा यहाँ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल है इस तरह के सम्मेलनों में लोगों को भेजने में काफ़ी धन लगता है मगर हम ये सुनिश्चित करने की कोशिश में हैं कि हम बार-बार लोगों को यहाँ भेजें. साथ ही हम और जो कुछ कर रहे हैं, जो भी दवा उपलब्ध करानी हैं उसके लिए भी धन बचाने की कोशिश में हैं." इस बीच थाईलैंड के प्रधानमंत्री थकसिन शिनवात्रा ने अपने देश और दूसरी जगहों के व्यावसायिक प्रमुखों को चेतावनी दी कि एड्स को सिर्फ़ स्वास्थ्य की समस्या नहीं समझा जाए. वैसे संयुक्त राष्ट्र पहले ही चेतावनी दे चुका है कि थाईलैंड एड्स के विरुद्ध संघर्ष में धीमा पड़ रहा है. एशिया में संक्रमण की दर अब भी अफ़्रीकी देशों से कहीं कम है मगर भारत और चीन में जिस तरह बड़ी जनसंख्या है उसका मतलब है कि अगर वहाँ दर कम भी है तब भी प्रभावितों की संख्या कहीं अधिक होगी. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इन देशों में स्थिति से निपटने के लिए और काफ़ी कुछ नहीं किया गया तो जो स्थिति होगी वो अफ़्रीकी देशों को कहीं पीछे छोड़ देगी. |
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