| मंडेला ने टीबी से लड़ने की अपील की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण अफ़्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला ने कहा है कि एड्स के ख़िलाफ़ लड़ाई तब तक नहीं जीती जा सकती जब तक विश्व समुदाय क्षयरोग (टीबी) से नहीं निपटता है. बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय एड्स सम्मेलन में उन्होंने कहा कि टीबी की लंबे समय तक अनदेखी की गई है. उन्होंने एड्स और टीबी से लड़ने के लिए बिल और मेलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन द्वारा दिए गए साढ़ चार करोड़ डॉलर के अनुदान का भी स्वागत किया. जब नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बात कर रहे थे तो वे कमज़ोर नज़र आ रहे थे लेकिन उनका संदेश स्पष्ट था. उन्होंने कहा कि एड्स और टीबी दोनों रोग का एक साथ होना घातक होता है, और एड्स के ख़िलाफ़ लड़ाई तब तक जीती जा सकती जब तक टीबी से नहीं निपटा जाता. उन्होंने कहा, "टीबी अक्सर उन लोगों के लिए जानलेवा ही होता है जिन्हें एड्स है. ऐसा नहीं होना चाहिए. हमें टीबी से निपटने के उपाय पचास साल से भी अधिक समय से मालूम हैं, जो कमी है वह संसाधन और इच्छाशक्ति की है." पूर्व राष्ट्रपति मंडेला जिन दिनों जेल में थे वे भी टीबी का शिकार हो गए थे, लेकिन इसका पता समय पर ही चल गया और उनका इलाज हो गया. उन्होंने कहा कि उनको जो मौक़ा मिल गया था वही दूसरे लोगों को भी मिलना चाहिए. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जब नेल्सन मंडेला जैसा कोई नेता दुनिया के लोगों से कहता है कि वह ग़लती कर रहे हैं तो उसकी अनदेखी करना आसान नहीं होता. दुनिया में एक तिहाई लोग टीबी से पीड़ित हैं. लेकिन जब वे एचआईवी से भी संक्रमित हो जाते हैं तब टीबी के ख़िलाफ़ लड़ने की उनकी शक्ति ख़त्म ही हो जाती है. एड्स की तुलना में टीबी की दवाइयाँ महंगी भी नहीं हैं. |
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