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मंगलवार, 13 जुलाई, 2004 को 07:44 GMT तक के समाचार
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अन्नान ने अमरीका को आड़े हाथों लिया
एड्स का मरीज़
एड्स तेज़ी से अपना शिकंजा कस रहा है
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने दुनिया भर में एड्स की रोकथाम के लिए इरादे की कमी को आड़े हाथों लिया है.

अन्नान ने ख़ासतौर पर अमरीका को निशाना बनाते हुए कहा है कि वह दुनिया भर में एड्स के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए पर्याप्त धन नहीं दे रहा है.

थाईलैंड में अंतरराष्ट्रीय एड्स सम्मेलन के मौक़े पर बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में कोफ़ी अन्नान ने कहा कि 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई' को ज़रूरत से ज़्यादा महत्व दिया जा रहा है जिसकी वजह से एड्स जैसी महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में संकल्प नज़र नहीं आ रहा है.

कोफ़ी अन्नान ने निराशा ज़ाहिर करते हुए कहा कि अमरीका और यूरोप एड्स के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए गठित 'ग्लोबल फ़ंड' में पर्याप्त धन नहीं दे रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता केरेन एलेन का कहना है कि कोफ़ी अन्नान ने इस ख़ास बातचीत में अपने हताशा और निराशा को क़तई नहीं छिपाया और उनके शब्द बेबाक और बिल्कुल साफ़ थे.

कोफ़ी अन्नान ने कहा कि 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई' में तो अरबों डॉलर झोंके जा रहे हैं, वहीं एड्स के ख़िलाफ़ लड़ाई में 'अंतरराष्ट्रीय एकजुटता' कहीं नज़र नहीं आ रही है.

अन्नान ने ख़ासतौर से अमरीका का ज़िक्र करते हुए कहा कि वे धन देने में बहुत टालमटोल करते रहे हैं.

उन्होंने कहा कि अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने क़रीब 15 अरब डॉलर एड्स के ख़िलाफ़ लड़ाई में सहयोग के लिए देने का वादा किया था लेकिन यह धन अभी तक ग्लोबल फ़ंड को नहीं मिला है.

चिंता तो लेकिन...

कोफ़ी अन्नान ने कहा कि राष्ट्रपति बुश एड्स से चिंतित तो नज़र आते है लेकिन अब वक़्त आ गया है कि इस महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में संकल्प पूरा किया जाए.

कोफ़ी अन्नान
सरकारें गंभीर नहीं हैं

थाईलैंड एड्स सम्मेलन में चल रही इस बहस पर कि यौन संबंधों में संयम बरतना चाहिए या कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए, कोफ़ी अन्नान ने कहा कि इस तरह की बहस बेकार है क्योंकि मक़सद यही है कि एड्स महामारी का मुक़ाबला किस तरह किया जाए.

उन्होंने कहा कि इस तरह की बहस से मूल मुद्दे से ध्यान बँटता है.

कोफ़ी अन्नान ने कहा कि अब प्राथमिकता ये है कि पर्याप्त धन एकत्र किया जाए और तमाम उपायों को लागू करने के लिए आगे बढ़ा जा.

उन्होंने कहा कि सिर्फ़ नेता लोग ही नहीं बल्कि निजी व्यवसाइयों और एक तरह से पूरे समाज को ही इसमें आगे आकर गंभीरता से प्रयास करने चाहिए.

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