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अमरीकी एड्स नीति पर बहस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एड्स की महामारी पर थाईलैंड में हो रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सोमवार को ख़ासतौर से एचआईवी और एड्स पर अमरीकी नीति पर बारीक़ी से विचार किए जाने की संभावना है. यह 15वाँ अंतरराष्ट्रीय एड्स सम्मेलन थाईलैंड की राजधानी बैंकाक में 11 से 16 जुलाई तक चल रहा है जिसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने अपना सहयोग दिया है. सोमवार को एड्स पर अमरीकी नीति पर चर्चा में ख़ासतौर से राष्ट्रपति बुश की उस सलाह पर भी विचार किया जाएगा जिसमें उन्होंने संक्रमण रोकने के लिए यौन संबंधों से परहेज़ करने को कहा है. बहुत से वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस सलाह से एड्स के ख़िलाफ़ जारी संघर्ष कमज़ोर होता है और उन्होंने अनुरोध किया है कि इसके उलट कंडोम के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. अमरीका ने इस सम्मेलन में भाग लेने वाले अपने प्रतिनिधिमंडल का आकार भी बहुत छोटा कर दिया, जिसकी काफ़ी आलोचना की जा रही है. बैंकाक में मौजूद बीबीसी संवाददाता कायली मौरिस का कहना है कि अमरीका ने इस बार पहले से उलट कम सरकारी वैज्ञानिक भेजे हैं और ऐसा शायद वित्त कारणों से किया गया है. अमरीका एचआईवी और एड्स के ख़िलाफ़ संघर्ष के लिए किसी भी देश से ज़्यादा धन देता है और अगले पाँच वर्षों में उसने क़रीब 15 अरब डॉलर ख़र्च करने का इरादा ज़ाहिर किया है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने इस सम्मेलन का रविवार उद्घाटन करते हुए कहा था कि बहुत से देश एचआईवी के संक्रमण और एड्स की महामारी को रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. उन्होंने सभी देशों के नेताओं से अनुरोध किया है कि वे एड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रयास करें. कोफ़ी अन्नान ख़ासतौर से महिलाओं के बारे में ज़्यादा चिंतित थे. उन्होंने कहा कि महिलाओं को इस बीमारी का ज़्यादा नुक़सान उठाना पड़ रहा है. |
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