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एड्स के टीके के परीक्षण का दूसरा दौर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में एचआईवी-एड्स निरोधक टीके के परीक्षण का दूसरा दौर अगस्त या सितंबर में शुरू किया जाएगा. यह घोषणा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदॉस ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर के एक कार्यक्रम में घोषणा की कि चेन्नई स्थित टीबी अनुसंधान केंद्र में परीक्षण किए जाएँगे. उन्होंने घोषणा की,'' इस टीके के परीक्षण अगस्त अथवा सितंबर के पहले सप्ताह में किए जाएँगे.'' मोडिफाइड वैक्सीनिया अंकारा नामक यह टीका आईसीएमआर, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन और इंटरनेशनल एड्स वैक्सीन इनीशिएटिव के सहयोग से विकसित किया जा रहा है. आईसीएमआर के निदेशक एनके गाँगुली ने बताया कि छह जीन को लेकर यह प्रतिरोधक टीका तैयार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस टीके से उन्हें बेहद उम्मीद है और इसके परीक्षण के लिए आवश्यक अनुमति ले ली गई है. परीक्षण इसके पहले आईसीएमआर ने एचआईवी-एड्स निरोधक टीके द एदेनो एसोसिएटेड वेक्टर बोर्न वैक्सीन (एएवी) के पहले चरण का पुणे में परीक्षण सफलतापूर्वक किया था. माना जा रहा है कि यदि सब ठीक चलता रहा तो अगले कुछ वर्षों में वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी. इस टीके के परीक्षण अनेक देशों में एक साथ चल रहे हैं. इसी तरह के परीक्षण जर्मनी और बेल्जियम में पहले ही चल रहे हैं. आरंभिक नतीजों के अनुसार ये परीक्षण एड्स वायरस से बचाव की दृष्टि से काफ़ी कारगर माने जा रहे हैं. भारत में एचआईवी वायरस से पीड़ित लोगों की संख्या 50 लाख से भी ज़्यादा है. लेकिन आईसीएमआर का कहना है कि आँकड़ों के लिहाज से यह बड़ी संख्या है लेकिन प्रतिशत के हिसाब से अफ़्रीका से बहुत कम है. |
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