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आयुर्वेद अल्ज़ाइमर में 'कारगर' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय आयुर्वेद स्नायु तंत्र से संबंधित गंभीर बीमारी अल्ज़ाइमर के इलाज में कारगर साबित हो सकता है. भारत और ब्रिटेन के वैज्ञानिक इस दिशा में प्राचीन आयुर्वेदिक दवाओं पर परीक्षण कर रहे हैं. भारत की परंपरागत आयुर्वेदिक दवाओं का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि दिमागी दक्षता बढ़ाने के लिए जिन जड़ी बूटियों का इस्तेमाल होता है उसका असर अल्ज़ाइमर के परंपरागत इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की तरह ही है. लंदन के किंग्स कॉलेज और कोलकाता के जाधवपुर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने उन पाँच पौधों का अध्ययन किया जिन्हें आमतौर पर आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है. ये दवाएँ व्यक्ति के दिमागी और शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करती हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि ये जड़ी बूटियाँ अल्ज़ाइमर से पीड़ित व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र को कमजोर होने से रोकती हैं. साथ ही यादाश्त और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है. अब इन जड़ी बूटियों में मौजूद उन रासायनिक तत्वों को पहचानने की कोशिश की जा रही है जिनसे अल्ज़ाइमर के मरीज़ों को लाभ पहुँचता है ताकि ज़्यादा असरदार दवा तैयार की जा सके. दरअसल अल्ज़ाइमर से पीड़ित व्यक्ति की यादाश्त धीरे धीरे कमजोर पड़ने लगती है और वह मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है. वैकल्पिक चिकित्सा भारत में जड़ी बूटी के ज़रिए वैकल्पिक इलाज पद्धति के तौर पर आयुर्वेद का इतिहास लगभग पाँच हज़ार वर्ष पुराना है. आयुर्वेदिक दवाओं में हल्दी, लहसुन, अदरक जैसे मसालों और अन्य पौधों का इस्तेमाल होता है. साथ ही शारीरिक और मानसिक बीमारियों के इलाज में यौगिक क्रियाओं का भी सहारा लिया जाता है. अल्ज़ाइमर बीमारी के कारणों का अभी पूरी तरह पता नहीं चल सका है. कुछ मामलों में इसकी वजह आनुवांशिक पाई गयी है. हालाँकि यह सिर्फ़ एक प्रतिशत है. | इससे जुड़ी ख़बरें दूसरों के धूम्रपान से हड्डियों को नुक़सान06 अगस्त, 2006 | विज्ञान तन्हाई कहीं जान न ले ले13 जुलाई, 2006 | विज्ञान दबाव से बढ़ सकता है रक्तचाप01 जुलाई, 2006 | विज्ञान चुंबन ला सकता है दिमाग़ में सूजन10 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान सिर्फ़ कुछ सिगरेट भी ख़तरनाक22 सितंबर, 2005 | विज्ञान एशियाई हेपेटाइटिस-सी के ख़तरे में03 सितंबर, 2005 | विज्ञान भावनाओं से दमा बढ़ सकता है31 अगस्त, 2005 | विज्ञान एचआईवी पीड़ितों की संख्या पर चिंता02 जून, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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