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गुरुवार, 13 जुलाई, 2006 को 11:00 GMT तक के समाचार
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तन्हाई कहीं जान न ले ले
एक महिला
शोध के मुताबिक अकेलापन दिल की बीमारियों का ख़तरा बढ़ा देता है.
अगर आप अकेले ज़िंदगी बिता रहे हैं तो यह आपके दिल के लिए एक ख़तरे की घंटी है और इससे बचना है तो तुरंत अपना कोई साथी खोज लें.

कुछ ऐसा ही सुझाव डेनमार्क में हुए एक शोध में दिया गया है कि अकेले रहने वाले लोगों को दिल की बीमारियों का ख़तरा जोड़े में रह रहे लोगों की तुलना में दोगुना ज़्यादा है.

शोध के मुताबिक अकेले रहने वाली 60 बरस से ऊपर की महिलाएँ और 50 बरस से ज़्यादा उम्र के पुरुषों को एंजाइना और दिल का दौरा पड़ने का ज़्यादा ख़तरा हो सकता है.

यह शोध एपिडेमोलॉजी एंड कम्यूनिटी हेल्थ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

विशेषज्ञ बताते हैं कि अकेले रहने वालों में खान-पान का ध्यान न देना और ज़्यादा धूम्रपान करना जैसी आदतें पाई जाती हैं जो कि इस ख़तरे को बढ़ा देती हैं.

इस शोध के लिए आर्हुस सीजियस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने आर्हुस क्षेत्र में रहने वाले 138,000 से भी ज़्यादा वयस्कों के आकड़ों का अध्ययन किया.

अध्ययन के मुताबिक वर्ष 200-02 के दौरान 646 लोगों में एंजाइना की गंभीर शिकायत या फिर दिल के दौरा पड़ने जैसी शिकायतें मिलीं. इनमें से कुछ लोगों की मौत गंभीर हृदय रोगों के कारण हुई.

उम्र और अकेलापन

पाया गया कि इन लोगों में बढ़ती उम्र और अकेलापन इन बीमारियों की अहम वजह थी.

60 वर्ष से ज़्यादा उम्र की तन्हा महिलाओं की तादाद कुल जनसंख्या का पाँच प्रतिशत ही थी पर 30 दिनों तक किए गए परीक्षण में पाया गया कि इस दौरान जिन लोगों का निधन हुआ उनमें इनकी तादाद एक तिहाई थी.

 दिल की बीमारियों का ख़तरा उन लोगों में ज़्यादा है जो कि अकेले रहते हैं. हालांकि कुछ और भी वजहें हो सकती हैं जिनकी हम अभी तक पड़ताल नहीं कर पाए हैं
डॉक्टर क्रिस्टीन नेल्सन, शोधकर्ताओँ के प्रमुख

इसी तरह अकेले रह रहे 50 वर्ष से ज़्यादा उम्र के पुरुषों की तादाद कुल जनसंख्या का आठ प्रतिशत था पर 30 दिनों की समयावधि में ऐसी बीमारियों से मरनेवालों की कुल तादाद में इनका प्रतिशत दो तिहाई तक था.

ऐसा पाया गया है कि जो लोग अपने साथी के साथ जीवन बिता रहे हैं, अच्छी शिक्षा प्राप्त हैं और कामकाज में ख़ुद को व्यस्त रखते हैं, उनमें इस तरह के ख़तरे की आशंका सबसे कम होती है.

और तो और, तलाकशुदा महिलाओं में भी इस तरह की बीमारियों का ख़तरा तुलनात्मक रूप से कम ही था.

ऐसा देखने को मिलता है कि अधिक कॉलेस्ट्राल और धूम्रपान जैसी समस्याएँ उन लोगों में ज़्यादा पाई जाती हैं जो कि अकेले रहते हैं.

ऐसे लोगों को सामाजिक सहयोग भी कम ही मिल रहा होता है और ये लोग अपने पारिवारिक चिकित्सकों के पास भी कम ही जाते हैं.

शोधकर्ताओं का नेतृत्व कर रहे डॉक्टर क्रिस्टीन नेल्सन कहते हैं, "दिल की बीमारियों का ख़तरा उन लोगों में ज़्यादा है जो कि अकेले रहते हैं. हालांकि कुछ और भी वजहें हो सकती हैं जिनकी हम अभी तक पड़ताल नहीं कर पाए हैं."

ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन के प्रवक्ता एलेन मासन भी मानते हैं कि अकेले रहने वालों के लिए उनकी तन्हाई से भी बड़ी समस्या उनकी जीवनचर्या है जिसमें उचित और अच्छा आहार न लेना और अधिक धूम्रपान करना शामिल है.

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