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बुधवार, 21 दिसंबर, 2005 को 04:14 GMT तक के समाचार
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अप्रत्यक्ष धूम्रपान से आँख को ख़तरा
आँख की जाँच
ब्रिटेन में उम्र से प्रभावित होने वाली आँख की बीमारियों के क़रीब पाँच लाख मरीज़ हैं
ब्रिटेन में एक शोध में कहा गया है कि धूम्रपान करने वालों के धुएँ का शिकार होने वाले लोग भी अंधेपन की एक सामान्य कारण का शिकार हो सकते हैं यानी अप्रत्यक्ष धूम्रपान नज़र के लिए बेहद ख़तरनाक साबित हो सकता है.

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक दल ने उम्र बढ़ने के साथ होने वाली नज़र समस्या का संबंध धूम्रपान के असर के साथ जोड़कर देखने के लिए अध्ययन किया जो नेत्र विज्ञान की ब्रितानी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

शोध से नतीजा निकला है कि धूम्रपान करने वाले के साथ पाँच साल तक रहने से अंधेपन का ख़तरा बढ़ जाता है और लगातार धूम्रपान करने से यह ख़तरा तीन गुना बढ़ जाता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अध्ययन इस बात को और पक्का करता है कि सार्वजनिक स्थलों और दफ़्तरों आदि में धूम्रपान पर पूर्ण रूप से रोक लगाई जाए.

पहले ही शोधों से पता चलता है कि धूम्रपान नज़र की समस्याओं का ख़तरा बढ़ाता है लेकिन इस ताज़ा अध्ययन ने यह भी साफ़तौर पर साबित कर दिया है कि अप्रत्यक्ष धूम्रपान भी उतना ही ख़तरा पैदा कर सकता है.

उम्र के साथ होने वाली नज़र की समस्या आमतौर पर 50 साल की उम्र पार करने के बाद होती है. धूम्रपान रैटिना के केंद्रीय हिस्से पर असर डालता है जो पढ़ने, कार चलाने वगैरा में बहुत ज़रूरी होती है.

हालाँकि ऐसी बात नहीं है कि इससे हमेशा ही अंधेपन का ख़तरा हो. ब्रिटेन में उम्र के साथ नज़र की समस्या से क़रीब पाँच लाख लोग प्रभावित हैं.

आदतें

शोधकर्ताओं ने ऐसी समस्या से प्रभावित 435 लोगों का अध्ययन किया. साथ ही 280 ऐसे लोगों का भी अध्ययन किया जिन्हें नज़र की ये समस्या नहीं थी.

आँख
धुएँ का असर भर भी आँख के लिए ख़तरनाक हो सकता है

उन लोगों की धूम्रपान आदतें भी देखी गईं और फिर बीमारियाँ कैसे बढ़ीं, इस पर भी नज़र डाली गई.

शोध में पता चला कि कोई व्यक्ति जितना ज़्यादा धूम्रपान करता है उसे और उसके साथ रहने वालों को नज़र की समस्या का ख़तरा उतना ही बढ़ता है.

चालीस साल तक नियमित रूप से सिगरेट का एक पैकेट या उससे ज़्यादा रोज़ाना धूम्रपान करने से यह ख़तरा लगभग तीन गुना बढ़ जाता है और धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के साथ क़रीब पाँच साल रहने भर से ही यह ख़तरा दोगुना हो जाता है.

हालाँकि शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जिसने बीस या उससे ज़्यादा वर्षों से धूम्रपान छोड़ रखा है उन्हें यह ख़तरा इतने कम स्तर पर आ जाता है जितना धूम्रपान नहीं करने वालों को.

रिपोर्ट के लिखने वाले दल में शामिल प्रोफ़ेसर डॉन येट्स का कहना था कि शोधकर्ताओं ने धूम्रपान और इस बीमारी के साथ सीधा संबंध ज़ाहिर कर दिया है.

रॉयल नेशलन इंस्टीट्यूट ऑफ़ ब्लाइंड्स में आँखों के स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्ष अनीता लिंगस्टोन का कहना था, "यह बहुत महत्वपूर्ण शोध है. इससे सार्वजनिक स्थानों औप तमाम दफ़्तरों में धूम्रपान पर रोक लगाने के अभियान को बल मिलता है."

ग़ौरतलब है कि सरकार ने इंग्लैंड में तमाम दफ़्तरों में धूम्रपान पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव किया है. इस प्रस्ताव में ऐसे पबों में धूम्रपान की इजाज़त होगी जहाँ भोजन नहीं खाया जाता है.

निजी क्लबों में भी धूम्रपान की इजाज़त होगी.

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