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'इलाज से रोकथाम बेहतर है' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ग़रीब और विकासशील देशों से अनुरोध किया है कि वे अपने यहाँ लंबी चलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए ठोस उपाय करें क्योंकि ऐसी बीमारियों से उन देशों की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रही है. संगठन ने कहा है कि हृदय रोग, डायबटीज़ और कैंसर जैसी ये बीमारियाँ ऐसी हैं जिन पर क़ाबू पाया जा सकता हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि लंबी चलने वाली बीमारियों के इलाज पर भारत और चीन जैसे देशों में हर साल अरबों-खरबों डॉलर ख़र्च होते हैं. संगठन ने कहा है कि हृदय रोग, डायबटीज़ और कैंसर की रोकथाम के लिए तुलनात्मक रूप से सस्ते उपायों से ही इनसे होने वाली मौतों को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है. संगटन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इन उपायों में तंबाकू के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना और फल और सब्ज़ियों के ज़्यादा इस्तेमाल को बढ़ावा देने जैसे उपाय शामिल हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पोलैंड का उदाहरण देते हुए कहा है कि वहाँ 45 साल से कम उम्र के लोगों में इस तरह की बीमारियों में महत्वपूर्ण कमी आई है. रिपोर्ट के अनुसार पोलैंड में खानपान में ज़्यादा फल और सब्ज़ियों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया है और मक्खन और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों पर से सब्सिडी हटाई गई है. संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर चीन भी पोलैंड से सबक ले तो वह 36 अरब डॉलर की बचत कर सकता है. अगला दशक संगठन ने कहा कि हृदय रोग, डायबटीज़ और कैंसर जैसी लंबी चलने वाली बीमारियों से अगले दशक में चालीस करोड़ लोगों की जान जा सकती है और समस्या कम और मध्य आय वाले देशों में ज़्यादा गंभीर है.
अपनी रिपोर्ट में संगठन ने कहा कि हृदय संबधी बीमारियों, दौरों और दूसरी श्रेणी की डायबटीज़ में से अस्सी प्रतिशत पर क़ाबू पाया जा सकता है और कैंसर के भी बड़े मामलों को रोका जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों को लोगों को धूम्रपान छुड़ाने और खान-पान में सुधार और ज़्यादा कसरत के लिए प्रोत्साहित करने में औद्योगिक देशों से सबक सीखना चाहिए. रिपोर्ट कहती है कि इन बीमारियों के इलाज के मुक़ाबले इनकी रोकथाम के उपाय ज़्यादा सस्ते हैं |
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