BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 31 मई, 2004 को 11:28 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
तंबाकू के ज़्यादा शिकार ग़रीब हैं
धूम्रपान
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि धूम्रपान और ग़रीबी में क़रीबी रिश्ता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में तंबाकू की लत का सबसे ज़्यादा नुक़सान ग़रीब तबके को ही हो रहा है.

सोमवार को विश्व तंबाकू निरोधक दिवस से ठीक पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ये चेतावनी जारी की.

संगठन का कहना है कि सरकार और लोगों को यह स्वीकार करना चाहिए कि धूम्रपान से कामकाज और आमदनी पर असर पड़ता है जिससे ग़रीबी बढ़ती है. साथ ही बीमारी और मृत्यु का भी यह एक बड़ा कारण बनता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताब़िक तंबाकू के प्रयोग से हर साढ़े छह सैंकड में औसतन एक आदमी की मौत होती है और कई बीमार पड़ते हैं.

इससे स्वास्थ्य सुविधाओं पर भार पड़ता है जिससे देश का आर्थिक ढाँचा प्रभावित होता है.

संगठन के महानिदेशक ली जौंग वुक ने कहा, "आसानी से बच सकने वाले इस मानवीय और आर्थिक नुक़सान को दुनिया को क़तई स्वीकार नहीं करना चाहिए."

कुचक्र

दुनियाभर में धूम्रपान के आदी लोगों में से 84 प्रतिशत विकासशील देशों में रहते हैं. देखा जाए तो इन्हीं जगहों पर तंबाकू संबंधी महामारी बढ़ रही है.

इस साल के विश्व तंबाकू निरोधक दिवस का विषय है - "तंबाकू और ग़रीबी: एक कुचक्र".

बचें तो अच्छा...
 आसानी से बच सकने वाले इस मानवीय और आर्थिक नुक़सान को दुनिया को क़तई स्वीकार नहीं करना चाहिए.
ली जौंग वुक
तंबाकू की खेती करने वाले ज़्यादातर किसान ग़रीब हैं और उनमें से बहुत से बच्चों से खेत मज़दूरी कराते हैं.

बच्चे शिक्षा के लिए विद्यालय जाने के बजाय मज़दूरी करके घर की आमदनी बढ़ाने में लग जाते हैं. इससे परिवारों को शुरू में भले ही कुछ फ़ायदा हो, लेकिन वे अशिक्षित रह जाते हैं और पूरी ज़िन्दगी ग़रीबी में बितानी पड़ती है.

इसके अलावा धूम्रपान की लत लगने पर लोग खान-पान, शिक्षा और स्वास्थ्य की जगह सिगरेट पर पैसे फूँक देते हैं. इससे वातावरण तो दूषित होता ही है, सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि हमें इसी कुचक्र को तोड़ना है.

इसके लिए वो सभी देशों से अपील कर रहे हैं कि वे आगे आकर तंबाकू निरोधक समझौते पर दस्तख़त करें. इस समझौते को 118 देशों का समर्थन प्राप्त है.

इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले देशों को तंबाकू पर प्रतिबंध लगाना पड़ेगा या तंबाकू के प्रचार-प्रसार नियम पाँच साल के अंदर और कड़े करने होंगे.

इसके अलावा सिगरेट के डिब्बों पर सेहत संबंधी चेतावनी देना और तंबाकू की चीज़ों पर कर बढ़ाने संबंधी प्रावधान भी दिए गए हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>