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धूल से भी धूम्रपान के ख़तरे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
धूम्रपान करने वाले माता-पिताओं के बच्चों पर घर में पाई जाने वाली धूल से असर पड़ सकता है. अमरीका में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि घर की धूल में फँसा तम्बाकू बच्चों के स्वास्थ्य पर कई घंटों के धूम्रपान जितना बुरा असर डाल सकता है. इससे पता चला कि जब माता-पिता घर से बाहर जा कर धूम्रपान कर रहे थे, तब भी घर के अंदर निकोटिन का स्तर काफ़ी ज़्यादा था. ये रिपोर्ट टोबैको कंट्रोल नामक पत्रिका में छपी है जिसमें कहा गया है कि तंबाकू के कणों से दमा जैसी बीमारियाँ हो सकती है और शिशुओं की अचानक मौत हो सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि घर में धूम्रपान के महीनों बाद तक, शिशुओं पर निकोटिन के कणों का ख़राब असर पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक़, बच्चों में साँस के ज़रिये इस धुँए के खिंचने का ज़्यादा ख़तरा बना रहता है क्योंकि वे ज़्यादा वक़्त घर के अंदर ही बिताते हैं, और धूम्रपान करने वाले से उनका क़रीबी संपर्क रहता है. धूल में फँसे कण दल के डा. जॉर्ज मैट और उनके सहकर्मियों ने अपने सर्वेक्षण में दो महीने से 12 महीने तक की उम्र के बच्चों वाले 49 घरों का अध्ययन किया. उन्होंने घर में पाई जाने वाली धूल, फ़र्श, बच्चों के बाल तथा मूत्र के नमूने लिये, और बच्चे के बेडरूम तथा बैठने के कमरे में निकोटिन की मात्रा मापने वाले यंत्र लगा दिए. उन्होंने पाया कि जिन घरों के माता-पिता घर के बाहर बीड़ी-सिगरेट पीते थे, उन घरों में तंबाकू के कण, उन घरों के मुक़ाबले सात गुणा अधिक पाए गए, जहाँ माता-पिता धूम्रपान नहीं करते थे. जिन घरों में वयस्क, घर के भीतर ही धूम्रपान करते थे, उनमें तंबाकू के विषैलेपन का स्तर, उन घरों से आठ गुणा ज़्यादा पाया गया, जहाँ माता-पिता घर से बाहर जा कर बीड़ी-सिगरेट पीते थे. डा. मैट ने बीबीसी न्यूज़ ऑनलाइन को बताया है कि यह सर्वेक्षण दिखाता है कि माता-पिताओं को यह ग़लतफ़हमी हो सकती है कि घर से बाहर जा कर धूम्रपान करने से उनके बच्चों पर तंबाकू के 'सेकेंड हैंड' धुँए का ख़राब असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा,"सेकेंड हैंड धुँए में कण इतने बारीक होते हैं कि वे फेफड़ों के बिल्कुल भीतर तक चले जाते हैं, जहाँ वे अपने छोटे आकार के कारण ख़तरनाक साबित हो सकते हैं." चेतावनी स्वास्थ्य पर धूम्रपान के दुष्प्रभावों के बारे में चेतावनी देने वाले संगठन, एक्शन ऑन स्मोकिंग एंड हेल्थ की रिसर्च मैनेजर, एमैंडा सैंडफ़र्ड का कहना है कि यह रिपोर्ट माता-पिताओं के लिए चेतावनी है. उन्होंने कहा,"अगर आप अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए हर-संभव कोशिश करना चाहते हैं, तो धूम्रपान बिल्कुल मत कीजिये." एमैंडा सैंडफ़र्ड का कहना है कि तंबाकू का धुआँ बच्चों में दमे की बीमारी की वृद्धि का कारण है. इससे बच्चों के कानों में ख़राबी, श्वास-नली की ख़राबी, शिशु का अचानक मौत हो जाना तथा कैंसर की बीमारी हो सकती है. ब्रिटेन में लगभग 50 प्रतिशत बच्चे ऐसे घरों में रहते हैं जहाँ माता या पिता में से कम से कम एक व्यक्ति धूम्रपान करता है. पैसिव स्मोकिंग यानी किसी और के धूम्रपान करने से जुड़ी बीमारियों के परिणामस्वरूप, हर साल 17,000 बच्चे अस्पताल में दाख़िल करवाए जाते हैं. |
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