'ज़ीका' की चपेट में आ सकते हैं 40 लाख लोग

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि अमरीकी महादेश में 30 से 40 लाख लोग ज़ीका वायरस से संक्रमित हो सकते हैं.
संगठन का कहना है कि अधिकतर मामलों में इस संक्रमण के लक्षण दिखाई नहीं देंगे, लेकिन इसका असर बच्चों के दिमाग़ पर पड़ सकता है.
ज़ीका वायरस के व्यापक रूप से फैलने की खबरों के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक आपातकालीन टीम का गठन किया है.
ज़ीका वायरस से पीड़ित गर्भवती महिलाएं ऐसे शिशुओं को जन्म देती हैं जिनका मस्तिष्क पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता. ब्राज़ील में पिछले कुछ समय से छोटे सिर के साथ पैदा होने वाले बच्चों के मामले बढ़े हैं.
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक मार्ग्रेट चान ने कहा कि ज़ीका वायरस भयंकर रूप ले रहा है.
ये आपातकालीन टीम सोमवार को बैठक कर ये तय करेगी की क्या ज़ीका को इबोला की तरह वैश्विक आपातकाल की तरह लिया जाना चाहिए.
पिछली बार डब्ल्यूएचओ ने पश्चिम अफ्रीका में इबोला के भीषण संक्रमण के बाद इसे अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी घोषित किया था. इबोला से दुनियाभर में 11 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई थी.
इससे पहले, अमरीकी वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत ज़रूरी क़दम नहीं उठाए गए, तो ज़ीका वायरस भयानक महामारी का रूप ले सकता है.
अमरीकी मेडिकल संस्थान की पत्रिका में डेनियल आर लूसी और लॉरेंस ओ गॉस्टिन ने लिखा है कि अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन इबोला की तरह इस वायरस से भी लड़ने में नाकाम रहा तो हजारों ज़िंदगियां दांव पर लग जाएंगी.

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बताया गया है कि ज़ीका वायरस को ख़त्म करने के लिए वैक्सिन तैयार करने में दो साल लग सकते हैं, जबकि दुनिया के कोने-कोने में इसे उपलब्ध होने में एक दशक जितना लंबा समय भी लग सकता है.
ज़ीका वायरस से पीड़ित गर्भवती महिलाएं ऐसे शिशुओं को जन्म देती हैं जिनका मस्तिष्क पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता.

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ब्राज़ील में इस वायरस के फैलने से लोगों में दहशत है. यहां इससे हज़ारों लोग संक्रमित हो चुके हैं. यहां से ये वायरस क़रीब 20 अन्य देशों में पहुंच चुका है.

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राष्ट्रपति दिल्मा रुसेफ़ ने वायरस से लड़ने में लैटिन अमरीका के लोगों से एकजुटता दिखाने की अपील की है.
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