हथिनी कैसे पैदा करेगी मैमथ का बच्चा?

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- Author, पल्लव घोष
- पदनाम, विज्ञान संवाददाता, बीबीसी
वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने विलुप्त हो चुके जीव 'वूली मैमथ' या विशालकाय हाथी का पूरा जीनोम सीक्वेंस तैयार कर लिया है.
अमरीका की वैज्ञानिकों की एक टीम पहले से ही हाथी के स्टेम सेल्स में मैमथ के जीन डालकर मैमथ के विषय में अध्ययन करने के प्रयास कर रही है.
वैज्ञानिक जानना चाहते हैं कि मैमथ अपने दूसरे संबंधियों से कैसे अलग थे और उनके शरीर में ऐसे क्या बदलाव आए जिनके कारण वे हिम युग में भी ज़िंदा रह पाए.
यह नया जीनोम शोध <link type="page"><caption> करंट बॉयोलाजी</caption><url href="www.cell.com/current-biology/abstract/S0960-9822(15)00420-0" platform="highweb"/></link> नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.
स्टॉकहोम के स्विडिश म्यूज़ियम ऑफ़ नैचुरल हिस्ट्री के डॉक्टर लव डेलेन ने बीबीसी से कहा कि इस डीएनए सीक्वेंस से उन वैज्ञानिकों को मदद मिलेगी जो इस जीव को दोबारा जीवित करना चाहते हैं.
फिर ज़िंदा होंगे मैमथ?

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उन्होंने कहा, "एक ज़िंदा मैमथ कैसे चलता है और कैसा व्यवहार करता है, यह देखना मज़ेदार होगा."
हालांकि डॉक्टर डेलेन और उनके साथ काम करने वाले वैज्ञानिक मैमथ को दोबारा जीवित करने के प्रयास नहीं कर रहे हैं, पर सेन फ़्रांसिस्को स्थित संस्था लॉन्ग नाओ फ़ाउंडेशन ऐसा करना चाहती है.
अपनी <link type="page"><caption> वेबसाइट पर</caption><url href="http://longnow.org/revive/" platform="highweb"/></link> नाओ फ़ाउंडेशन कहती है, कि उसका उद्देश्य ऐसे मैमथ पैदा करना है जो यूरेशिया और उत्तरी अमरीका के टूंड्रा के ठंडे इलाक़ों में रह सकें.
यह संस्था हार्वर्ड यूनीवर्सिटी की उस टीम की मदद कर रही है जो जेनेटिक इंजीनियरिंग की तकनीक के ज़रिए हाथियों में मैमथ के जीन डालने का प्रयास कर रही है.

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संस्था का कहना है कि अभी तक उसने मैमथ के ख़ून, चर्बी और बालों के जींस हाथी मे डाले हैं.
2018 में क्लोन
शोधकर्ता मैमथ के रेड ब्लड सेल निर्मित कर इन सेल की ऑक्सीजन रखने की क्षमता के बारे में जानना चाहते हैं ताकि मैमथ के शरीर के बारे में अधिक जानकारी मिल सके.
शोधकर्ताओं का दावा है कि ऐसे ही प्रयोगों से पता चल सकेगा कि मैमथ की चर्बी और बाल कैसे बढ़ते थे.
लांग नाओ फ़ाइंडेशन का कहना है कि इस तरीक़े का इस्तेमाल कर मैमथ का क्लोन तैयार करने के प्रयास 2018 में शुरू हो सकेंगे.

हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह मैमथ को पैदा करने के रास्ते में कई रुकावटें हैं.
यूनीवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया की प्रोफ़ेसर बेथ शापिरो जिन्होंने मैमथ के क्लोन बनाने पर क़िताब लिखी है कहती हैं, "प्रयोगशाला में एक सेल जिसके जींस में कुछ बदलाव किए गए हों और एक ज़िंदा जानवर में बहुत फ़र्क़ है."
शापिरो कहती हैं, "उस सेल से भ्रूण बना कर उसे एक कोख में स्थापित करना होगा. हमें एक गर्भाधान कराना होगा और यह कोशिश करनी होगी कि यह गर्भाधान कामयाब हो."
हथिनी के लिए सही नहीं
डेलेन कहती हैं कि ऐसा करना हथिनी के लिए सही नहीं होगा.
वे कहती हैं, "मुझे लगता है कि ऐसी कोशिश करना हथिनी के लिए कष्ट का कारण होगा और ऐसा करना नैतिक तौर पर ठीक नहीं होगा."

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शापिरो मैमथ को दोबारा जीवित करने के विचार का विरोध करती हैं.
वे कहती हैं कि हाथी सामाजिक प्राणी होते हैं. एक मैमथ पैदा कर उसे अकेला बांध कर रखना सही नहीं होगा. जब तक हम हाथी का बिना इस्तेमाल किए इस तरह के कई मैमथ ना बना सकें इस बारे में सोचना ठीक नहीं.
उन्हें लगता है कि इस जीनोम से मैमथ के बारे में और भी बहुत सी जानकारियाँ मिल सकेंगी.
मैमथ आज से चार हज़ार साल पहले विलुप्त हो गए थे. विलुप्त होने के समय मैमथ के साथ क्या हुआ था यही जानने के लिए डॉक्टर डेलेन और उनके सहयोगियों ने इसके डीएनए को सीक्वेंस तैयार किया है.

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जेनेटिक डाटा से ये भी पता चलता है कि तीन लाख साल पहले मैमथ की जनसंख्या में गिरावट आई थी.
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