अब पता चल सकेगा सीज़ेरियन का

स्वीडन में डॉक्टरों के मुताबिक एक परीक्षण करके पता लगाया जा सकता है कि गर्भवती महिला का बच्चा 'नॉर्मल' पैदा होगा या सीज़ेरियन से.
इस परीक्षण को स्वीडिश कंपनी ऑब्सटीकेयर ने लिवरपूल यूनिवर्सिटी और लिवरपूल वूमंस हॉस्पिटल की मदद से करवाया है.
शोधकर्ताओं के मुताबिक जब 'एम्नियोटिक फ्लूड' में 'लैक्टिक एसिड' की मात्रा अधिक होती है तो इस बात की संभावना अधिक होती है कि गर्भवती महिला से बच्चा बिना ऑपरेशन के पैदा होगा.
'एम्निओटिक फ्लूड' में गर्भ में पल रहा बच्चा विकसित होता है. इस एसिड की मात्रा का पता लगाकर सीज़ेरियन की संभावना का पता लगाया जा सकता है.
इस परीक्षण का इस्तेमाल यूरोप के कई अस्पतालों में किया जा रहा है.
ब्रिटेन में आधे से अधिक सीज़ेरियन ऑपरेशन आपातकालीन होते हैं. इनमें मां और बच्चे दोनों के जीवन को बचाने के लिए अनिवार्य ऑपरेशन करना पड़ता है.
लैक्टिक एसिड
अध्ययन से पता चलता है कि बाकी मांसपेशियों की ही तरह गर्भाशय भी श्रम करते 'लैक्टिक एसिड' स्रावित करता है. इसकी मात्रा जब एक सीमा से अधिक हो जाती है तो मांसपेशी के सिकुड़ने की प्रकिया बाधित होने लगती है.
लैक्टिक एसिड की कम मात्रा का मतलब है कि गर्भाशय में अभी भी सिकुड़ने की प्रक्रिया हो सकती है जो बच्चे को पुश आउट करने के लिए ज़रूरी है.
ऑब्सटीकेयर के जोहान उबी का कहना है कि इस परीक्षण से डॉक्टरों को यह जानने में मदद मिलेगी कि किस गर्भवती महिला से बच्चा सीधे योनिमार्ग से पैदा होगा.
उन्होंने कहा, "गर्भ में मौजूद एम्नियोटिक फ्लूड में लैक्टिक एसिड की अधिक मात्रा का मतलब है कि गर्भाशय थका है. ऐसे में गर्भवती महिला से पुश करने के लिए कहने का मतलब है कि आप किसी मैराथन धावक से आख़िरी लाइन पार करने के बाद दस किलोमीटर और दौड़ने के लिए कह रहे हैं."
कई बार ऐसा भी होता है कि जिस महिला को सीज़ेरियन की ज़रूरत नहीं होती, उसे भी सीज़ेरियन से गुजरना पड़ता है.
उबी ने कहा कि इस परीक्षण के बाद ऐसे मामलों में कमी आएगी. साथ ही गर्भ से जुड़ी जटिलताओं के खतरे को कम करने में भी मदद मिलेगी.












