मलहम कर सकता है एड्स से महिलाओं की रक्षा

एड्स के ख़िलाफ़ जंग तेज़ करने के लिए विएना में प्रदर्शन हो रहे हैं.
इमेज कैप्शन, एड्स के ख़िलाफ़ जंग तेज़ करने के लिए विएना में प्रदर्शन हो रहे हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि सेक्स से पहले योनि के अंदर लगाए जाने वाले एक मलहम ने महिलाओं में एड्स के ख़तरे को लगभग 50 प्रतिशत कम कर दिया है.

दक्षिण अफ़्रीका में चल रहे इस परीक्षण के बाद वैज्ञानिकों का कहना है कि एचआईवी वायरस से ग्रस्त पुरूषों के साथ यौन संबंध से संक्रमित होनेवाली महिलाओं के लिए ये ख़ासा कारगर साबित हो रहा है.

लगभग नौ सौ महिलाओं पर किए गए परीक्षण के बाद वैज्ञानिकों ने कहा है कि एक साल तक इसके इस्तेमाल के बाद संक्रमण की दर 50 प्रतिशत कम हो जाती है और ढाई साल के बाद 39 प्रतिशत की कमी आती है.

यदि इन परिणामों की पुष्टि हो जाती है तो ये पहली बार होगा कि कोई मलहम कारगर साबित होगा.

माना जा रहा है कि इस तरह का मलहम ऐसी महिलाओं के लिए काफ़ी कारगर हो सकता है जिनके पार्टनर कंडोम का इस्तेमाल नहीं करते हैं.

इस मलहम को बनाने में एड्स की दवा टेनोफ़ोविर का इस्तेमाल किया गया है.

इस मलहम पर दक्षिण अफ़्रीका के एड्स शोध केंद्र में तीन साल से काम चल रहा है और इसे विएना के अंतरराष्ट्रीय एड्स सम्मेलन में पेश किया गया है. अमरीकी विज्ञान पत्रिका साइंस ने इस शोध को सोमवार को प्रकाशित किया.

इसमें कहा गया है कि यदि इस मलहम का इस्तेमाल सेक्स से 12 घंटे पहले और फिर 12 घंटे बाद किया जाए तो ये पूरी तरह से सुरक्षित है.

परीक्षण में शामिल ज़्यादातर महिलाओं ने मलहम का उसी तरह प्रयोग किया जैसे उन्हें बताया गया.
इमेज कैप्शन, परीक्षण में शामिल ज़्यादातर महिलाओं ने मलहम का उसी तरह प्रयोग किया जैसे उन्हें बताया गया.

शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन महिलाओं ने इस मलहम का प्रयोग किया है उनमें सेक्स से जुड़ी दूसरी बीमारियों की दर भी कम हो गई.

विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र की एड्स एजेंसी ने इस परीक्षण के परिणामों को बेहद अहम बताया है.

यूएनएड्स के निदेशक माइकल सिडिबे का कहना है, “हम महिलाओं के लिए एक उम्मीद जगा रहे हैं. पहली बार हम एक परिणाम देख रहे हैं जिसमें एचआईवी से लड़ने का विकल्प महिलाओं के हाथ में है.”

एचआईवी वायरस के प्रसार को रोकने की तरकीबों की बेसब्री से तलाश की जा रही है ख़ासकर कई अफ़्रीकी देशों के लिए जहां एड्स बीमारी पैदा करनेवाले इस वायरस से ग्रस्त मरीज़ो में 60 प्रतिशत महिलाएं हैं.

महिलाओं को अक्सर असुरक्षित सेक्स के लिए बाध्य किया जाता है और पुरूषों के मुक़ाबले इस वायरस से संक्रमण का ख़तरा महिलाओं में ज़्यादा है.