थोक में मिले नए ग्रह

खगोलशास्त्रियों ने हमारे सौर मंडल से बाहर 32 नए ग्रहों की खोज की घोषणा की है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि इनमें पृथ्वी के आकार से पांच गुना बड़े ग्रहों से लेकर ऐसे ग्रह भी शामिल हैं जो बृहस्पति से पाँच से लेकर 10 गुना बड़े हैं.
इन ग्रहों की खोज दक्षिणी अमरीकी देश चिली स्थित यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला की 3.6 मीटर लंबी दूरबीन से की गई. इस दूरबीन में लगे एक बहुत ही संवेदनशील उपकरण से इन ग्रहों की पहचान संभव हो सकी.
ये खोज इसलिए बहुत उत्साहजनक है क्योंकि इससे ये संकेत मिलते हैं कि हमारी आकाशगंगा में छोटे आकार के अनगिनत ग्रह हो सकते हैं.
स्विटज़रलैंड के जिनीवा विश्वविद्यालय के स्टिफ़ेन उद्री ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा, "अपने शोध परिणामों से अब हमें ये मालूम हो गया है कि सूर्य जैसे कम से कम 40 प्रतिशत तारों के कई छोटे आकार वाले ग्रह हैं. इसका मतलब ये है कि छोटे आकार वाले ग्रह हर जगह हैं".
पहचान की हार्प्स तकनीक
इन 32 नए ग्रहों की खोज के बाद अब हमारे सौर मंडल के बाहर खोजे गए ग्रहों की संख्या 400 हो गई है.
इनकी पहचान कई तरह की खगोलीय तकनीकों और दूरबीनों का इस्तेमाल करके की गई थी लेकिन इन 32 नए ग्रहों की खोज यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला की दूरबीन में लगे हार्प्स स्पेक्टोमीटर के पर्यवेक्षण के फलस्वरूप हो पाई.
हार्प्स या हाइ ऐक्योरेसी रेडियल वेलॉसिटी प्लेनेट सर्चर उपकरण से ग्रहों की खोज परोक्ष विधि से की जाती है. इन ग्रहों के गुरुत्व से उनके तारे की गति में जो एक खिंचाव सा दिखाई देता है उसी से ग्रहों का पता लगाया जाता है.
ग्रहों की खोज की जो वर्तमान तकनीक है उससे बृहस्पति के आकार के या उससे भी बड़े ग्रहों की खोज हो पाई है. जबकि हार्प्स तकनीक ने छोटे और अपेक्षाकृत ठंडे तारों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है जिससे छोटे आकार के ग्रहों का पता लगाया जा सके जो हमारे सौर मंडल के पथरीले ग्रहों से मेल खाते हों.
पृथ्वी जैसे ग्रह की खोज का लक्ष्य
हार्प्स ने इससे पहले अप्रैल में एक आकाशीय पिंड की पहचान की थी जो पृथ्वी से दोगुना था. लेकिन वैज्ञानिकों को विश्वास है कि इस ग्रह में जीवन नहीं हो सकता क्योंकि ये अपने तारे के बहुत पास से चक्कर लगाता है.
इन 32 नए ग्रहों की खोज के बाद हार्प्स के खोजी दल को भरोसा है कि अगले छ महीनों में वो और कई ग्रहों की खोज कर सकेंगे.
खगोलशास्त्रियों का अंतिम लक्ष्य है ऐसे पथरीले ग्रह की खोज करना जो अपने तारे के न अधिक पास हो और न अधिक दूर जहां तापमान इतना हो जो तरल जल की उपस्थिति को संबल दे सके यानि जहां जीवन की संभावना हो.
वैज्ञानिकों का विश्वास है कि नई और अधिक संवेदनशील तकनीक के आने से वो कुछ ही साल के भीतर ऐसे ग्रह का पता लगा सकेंगे.
अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने हाल में अपना केपलर टेलिस्कोप लगाया है जो एक अलग ही तकनीक से पृथ्वी के आकार के ग्रहों की खोज की आशा करता है.












