दुनिया की पहली इलेक्ट्रिक कार का सपना कैसे टूट गया था

इलैक्ट्रिक कार

इलेक्ट्रिक कारें जो आज बाज़ार में अपनी खास जगह बना चुकी हैं उन्होंने अपनी शुरुआत में ही दम तोड़ दिया था.

साल 1996 में इलेक्ट्रिक कार के बारे में सोचा गया, वो बनीं भी और सड़कों पर उतरी लेकिन फिर वो सपना टूट गया.

प्रीयस और टेस्ला से भी पहले 1996 में कार निर्माता कंपनी जनरल मोटर्स ने पहली बार बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक कार निर्माण किया था.

इसे बनाने में दशकों का समय और अरबों डॉलर लगे थे.

ये दुनिया की बड़े स्तर पर निर्मित इलेक्ट्रिक कार थी. दो बार प्रस्ताव देने पर बनी इस कार को लोगों ने बेहद पसंद भी किया.

इसका बड़े स्तर पर उत्पादन हुआ और बिक्री भी लेकिन फिर भी इन कारों को नष्ट करना पड़ा.

आपको बताते हैं कि कैसे एक इलेक्ट्रिक कार का सपना टूट गया.

वीडियो कैप्शन, एलन मस्क ने टेस्ला को टॉप कंपनी कैसे बनाया? Duniya Jahan

रिसर्च इंजीनियर वैली रिपल बताते हैं, "साठ के दशक में मैं कैलटेक में एक स्टूडेंट था. उन दिनों प्रदूषण के कारण धुंध इतनी ज़्यादा होती थी कि खुश होने के बावजूद भी लोगों की आंखों से आंसू आने लगते थे. मैं सोचता था कि इसका क्या तकनीकी समाधान हो सकता है."

उस दौरान प्रदूषण कम करने के लिए उपायों पर चर्चा भी हो रही थी. उसमें एक उपाय ये भी था कि गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जाए.

एक इलेक्ट्रिक कार पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों का विकल्प हो सकती थी.

इलेक्ट्रिक कार के लिए 1985 में 'इलेक्ट्रोस्प्रिट' प्रस्ताव दिया गया था लेकिन इसे फंड नहीं मिल पाया.

भले ही वो प्रस्ताव असफल हो गया लेकिन बाद में एक और प्रयास किया गया.

रिसर्च इंजीनियर वैली रिपल
इमेज कैप्शन, रिसर्च इंजीनियर वैली रिपल

कैसे बनी इलेक्ट्रिक कार

साल 1987 में जनरल मोटर्स ने अन्य कंपनियों के साथ मिलकर सौर ऊर्जा से चलने वाली एक रेसिंग कार 'सनरेसर' बनाई. इस कार ने सौर ऊर्जा से चलने वाली दुनिया की पहली रेस में बाज़ी मार ली.

वैली रिपल कहते हैं, "जीएम सनरेसर सौर ऊर्जा से चलने वाली गाड़ी के लिए एक क्रांतिकारी डिज़ाइन था. सनरेसर ने इतना अच्छा काम किया कि इसने डेढ़ दिन में रेस जीत ली. हमें जनरल मोटर्स से कहना पड़ा कि हमें उनके साथ काम करना है. फिर हमने दूसरा प्रस्ताव दिया जिसका नाम था 'इमपैक्ट प्रोपोज़ल'."

"आइडिया ये था कि एक सवारी गाड़ी बनाई जाए जिसका ना सिर्फ़ बेहतर इस्तेमाल हो सके बल्कि उसे चलाने में भी मज़ा आए. हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि गाड़ी को आठ सेकेंड में 60 मील प्रति घंटे की रफ़्तार तक पहुंचाया जा सकता है."

"इस स्तर की क्षमता किसी भी इलेक्ट्रिक गाड़ी में नहीं देखी गई थी. मैं ऐसा कुछ ड्राइव करने का सपना देखा था. इसकी रफ़्तार गज़ब की थी. मैं उस वक़्त बहुत ही उत्साहित था क्योंकि हमारी सोच हीक़कत बन रही थी."

इलेक्ट्रिक कार को लेकर दूसरा प्रस्ताव दिया गया था 'इम्पैक्ट प्रपोज़ल'

इमेज स्रोत, AeroVironment Inc.

इमेज कैप्शन, इलेक्ट्रिक कार को लेकर दूसरा प्रस्ताव दिया गया था 'इम्पैक्ट प्रपोज़ल'

अमेरिका के कैलिफॉर्निया में वायु गुणवत्ता को लेकर कड़े नियम-क़ानून थे लेकिन लॉस एंजलिस उसे पूरा नहीं कर सकता था.

कैलिफॉर्निया एयर रिसोर्सेज बोर्ड (कार्ब) को कार के बारे में पता चला और अनिवार्य कर दिया गया कि बेची गईं कारों के दो प्रतिशत से शून्य-उत्सर्जन होना चाहिए.

वैली रिपल बताते हैं कि मैंने कार्ब के साथ मीटिंग की लेकिन जनरल मोटर्स का नाम नहीं बताया. मैंने बस कहा कि एक बड़ी कार कंपनी. उन्हें लगा कि 'फोर्ड'. इसलिए मैंने कहा कि 'नहीं इससे बड़ी'.

कैलिफॉर्निया एयर रिसोर्सेज बोर्ड के डॉन द्राचंद कहते हैं, "लोगों के लिए उस वक़्त इलेक्ट्रिक कार गोल्फ़ के मैदान में चलने वाली गाड़ियां ही हुआ करती थीं और वो रोज़ाना के इस्तेमाल के लिए नहीं थीं. जनरल मोटर्स ने 'इम्पैक्ट' के साथ ये साबित किया कि अगर आप सही दिशा में काम करते हैं तो आप एक बेहतर उत्पाद ला सकते हैं."

जनरल मोटर्स के इलेक्ट्रिक कार वापस लेने के बाद हॉलीवुड में एक शोकसभा भी आयोजित की गई थी.

इमेज स्रोत, Plug in America

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इलेक्ट्रिक कार की चर्चा आगे बढ़ने के बाद ज़ेडईवी मेंडेट को प्रोत्साहन मिला. ज़ेडईवी मेंडेट ये था कि कार निर्माताओं की बिक्री का एक हिस्सा इलेक्ट्रिक कार से होने चाहिए.

जब ये नियम आया तब जनरल मोटर्स को इलेक्ट्रिक कार बनानी पड़ी और बाज़ार में ईवी1आई.

लोगों ने इसे निजी और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए खरीदना शुरू किया. ड्राइवर ईवी1 को 500 डॉलर प्रति माह पर किराए पर दे सकते थे.

वैली रिपल कहते हैं, "इस गाड़ी ने ना सिर्फ़ इस चलाने वाले लोगों की बल्कि इंजीनियर्स की भी कल्पनाओं को उड़ान दी. अब उन्हें ये सोचना था कि ये गाड़ी बन गई है, अच्छी है लेकिन इसे बेहतर बनाने के लिए क्या किया जा सकता है."

इलेक्ट्रिक कार ईवी 1

क्यों वापस ली गईं इलेक्ट्रिक कारें

वैली रिपल के मुताबिक ईवी1 को बनाने में जनरल मोटर्स ने अरबों डॉलर का खर्चा किया. ऐसे भी लोग थे जो इसे जल्द से जल्द बंद कराना चाहते थे.

गैसोलीन कार बनाने वाली कंपनी के लिए इलेक्ट्रिक कारों के उत्सर्जन मुक़्त होने के फायदों पर बात करना मुश्किल होता है.

क्योंकि इस तरह आप ये कह रहे होते हैं कि आपके दूसरे उत्पाद इस ज़रूरत के अनुरूप नहीं हैं. ऐसे में ये निष्कर्ष निकला कि ईवी1 फायदेमंद नहीं होने वाली है.

साल 2004 में सारी ईवी1 कारों को वापस लेकर नष्ट कर दिया गया. कार मालिकों से उनकी इलेक्ट्रिक कार वापस ली जा रही थी तो हॉलीवुड में एक शोकसभा भी आयोजित की गई.

जनरल मोटर्स के इलेक्ट्रिक कार वापस लेने के बाद हॉलीवुड में एक शोकसभा भी आयोजित की गई थी.

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वैली रिपल ने उस समय कहा था, "मुझे लगता है कि एक देश के तौर पर हम गलत कदम उठा रहे हैं. उम्मीद है कि हमें इसका अहसास होगा और हम प्रगति की दिशा में फिर से आगे बढ़ेंगे."

वह कहते हैं, "ईवी1 को नष्ट करने या कहें कि इलेक्ट्रिक गाड़ी के काल के अंत ने हमें कार्बन उत्सर्जन से मुक़्त गाड़ियां बनाने के इस तकनीकी संघर्ष में सालों पीछे धकेल दिया है. काश हमने वो नहीं किया होता. काश कोई ये कह पाता कि हां हम पैसा खर्च कर रहे हैं लेकिन हमारे पास एक दृष्टिकोण है. मुझे लगता है कि आज टेस्ला जहां है, जनरल मोटर्स उससे आगे होती."

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