सामान डिलवरी के तरीक़े बदल रहे हैं, बिना ड्राइवर की डिलीवरी वैन को मिली इजाज़त

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मुमकिन है कि आने वाले समय में आपका ऑनलाइन ऑर्डर किया गया सामान कोई इंसान नहीं, एक मशीन लेकर आए - एक ऐसी मशीन जिसे चलाने के लिए भी किसी इंसान की ज़रूरत न पड़े.
अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में बिना ड्राइवर की चलने वाली एक ऐसी ही गाड़ी को ऑपरेट करने की इजाज़त दे दी गई है.
न्यूरो नाम की रोबोटिक कंपनी अगले साल की शुरुआत से इस तरह की डिलीवरी शुरू कर सकती है.
इस गाड़ी की अधिकतम स्पीड 35 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी, और इसे सिर्फ़ 'सही मौसम' में ऑपरेट करने की इजाज़त दी जाएगी.

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कैलीफ़ोर्निया के डिपार्टमेंट ऑफ़ मोटर के डायरेक्टर स्टीवेन गॉर्डन के मुताबिक़, "पहली बार इस तरह के डिपलॉयमेंट का आदेश देना ड्राइवरलेस गाड़ियों के लिहाज़ से बेहतरीन है."
कितनी सुरक्षित हैं ऐसी गाड़ियां?
उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिहाज़ से इसकी लगातार मॉनीटरिंग की जाएगी. न्यूरो की स्थापना गूगल के दो पूर्व इंजीनियर ने की थी, और इसे सॉफ्टबैंक से फंडिग मिली है.
इनकी गाड़ियां ख़ासतौर पर बिना ड्राइवर के चलने के लिए डिज़ाइन की जाती हैं.
इस गाड़ी में थर्मल इमेजिंग 360 डिग्री कैमरा लगा है जो कि इसे चलाने में मदद करता हैं. आम गाड़ियों की तरह इसमें स्टीयरिंग वील, पैडेल और साइड व्यू मिरर नहीं हैं.
ये आम गाड़ियों से छोटा है और अंडे की आकार का दिखता है. इसके केबिन के तापमान को कंट्रोल किया जा सकता है ताकि अंदर रखा सामान ख़राब न हो. इसके दरवाज़े ऊपर की तरफ़ खुलते हैं, और इन्हें खोलने के लिए एक ख़ास कोड की ज़रूरत होती है. ये कोड उनको दिया जाता है जिन्हें समान की डिलीवरी लेनी हो.
हालांकि ट्रांसपोर्ट के जानकारों का कहना है कि सुरक्षा एक अहम मुद्दा बना रहेगा.
बिर्मिंघम विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डेविड बैले के मुताबिक़, "शुरुआत बहुत कम गाड़ियों के साथ होगी, हालांकि इस तकनीक की बहुत अच्छे तरीके से जाँच की गई है."
"पहले इन्हें सिर्फ़ सीधी सड़कों पर चलाया जाएगा. इनकी स्पीड भी 35 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं होगी, छोटे बॉट की स्पीड को 25 किलोमीटर प्रतिघंटा ही रखा जाएगा."
"ये ट्रायल छोटे लेवल पर होगा, लेकिन कह सकते हैं कि ड्राइवरलेस गाड़ियों की दिशा में ये बड़ा क़दम है."
क्या भारत में चलेंगी ऐसी गाड़ियां?
दुनियाभर में ड्राइवरलेस गाड़ियों को लेकर चर्चाएं हो रही हैं, कई प्रमुख कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रही हैं.
अक्तूबर में अमेरिका के एरिज़ोना में गूगल मे अपनी ड्राइवरलेस गाड़ी वेमो का ट्रायल किया था. इसी तरह का ट्रायल चीन के शंघाई में अलीबाबा कंपनी ने भी किया है. दुनिया के कई दूसरे देशों में भी ऐसे ट्रायल किए जा रहे हैं.
लेकिन भारत ने ड्राइवरलेस गाड़ियों को लेकर बहुत रुचि नहीं दिखाई है. भारत सरकार का मानना है कि इससे बड़ी संख्या में लोगों के बेरोज़गार होने का ख़तरा है.
हालांकि सामान की डिलीवरी के लिए ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर कई कंपनिया ट्रायल ज़रूर कर रही है.
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