कोरोना वायरसः कोरोना वायरस का टीका बनाने से दुनिया कैसे चूक गई

इमेज स्रोत, ANNA GROVE PHOTOGRAPHY
- Author, मारिया एलीना नवास
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
साल 2002 में चीन के ग्वांझो प्रांत में एक अनजाने से वायरस की वजह से एक महामारी फैली जिसे वैज्ञानिकों ने सार्स (SARS) का नाम दिया था.
सार्स (SARS) का मतलब था सीवियर एक्यूट रेसपिरेटरी सिंड्रोम यानी ऐसी बीमारी जो सांस की तकलीफ़ का कारण बनती है.
बाद में वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि सार्स बीमारी कोरोना वायरस की वजह से होता है और ये जानवरों से शुरू होकर इंसानों तक पहुंच गया.
उस समय ये वायरस कुछ ही महीनों में 29 देशों में फैल गया है, 8000 से ज़्यादा लोग संक्रमित हुए जबकि 800 से ज़्यादा लोगों की जान गई.
तब पूरी दुनिया ये जानना चाह रही थी कि इसका टीका कब तक तैयार हो जाएगा और यूरोप, अमरीका और एशिया के दर्जनों वैज्ञानिकों ने बहुत तेज़ी से इसका टीका तैयार करने पर काम शुरू कर दिया था.
कई उम्मीदवार उभरे थे, उनमें से कुछ ने तो यहां तक कहा कि वे क्लीनिकल ट्रायल के तैयार हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
टीका तैयार करने की ज़रूरत
लेकिन तभी सार्स महामारी पर काबू पा लिया गया और कोरोना वैक्सीन पर जारी तमाम रिसर्च बंद हो गए.
कुछ सालों बाद 2012 में एक और जानलेवा कोरोना वायरस मर्स-कोव (मिडल ईस्ट रेसिपेरिटरी सिंड्रोम) का प्रकोप हुआ. ये ऊंटों से इंसानों तक पहुंचा था.
तब भी बहुत सारे वैज्ञानिकों ने इन रोगाणुओं के ख़िलाफ़ टीका तैयार करने की ज़रूरत एक बार फिर से दोहराई.
आज लगभग 20 साल बाद जब नए कोरोना वायरस SARS-Cov-2 ने तकरीबन 15 लाख लोगों को संक्रमित कर दिया है तो एक बार फिर दुनिया में ये सवाल पूछा जाने लगा है कि इसका टीका कब तक तैयार हो जाएगा.
कोरोना वायरस के अतिक्रमण की पिछली घटनाओं से हम सबक क्यों नहीं ले पाए जबकि ये मालूम था कि इसकी वजह से कोविड-19 जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है?
और टीका तैयार करने वाले रिसर्चों को आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया.

- कोरोना महामारी, देश-दुनिया सतर्क
- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- कोरोना वायरस का बढ़ता ख़तरा, कैसे करें बचाव
- कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क पहनना क्यों ज़रूरी है?
- कोरोना: मास्क और सेनेटाइज़र अचानक कहां चले गए?
- अंडे, चिकन खाने से फैलेगा कोरोना वायरस?
- कोरोना वायरस: बच्चों को कोविड-19 के बारे में कैसे बताएं?
- कोरोना वायरस: संक्रमण के बाद बचने की कितनी संभावना है
- कोरोना वायरस का कहर बरपा तो संभल पाएगा भारत?
- कोरोना वायरस: क्या करेंसी नोट और सिक्कों से भी फैल सकता है?
- कोरोना वायरस: तीसरे चरण के संक्रमण से बचने के लिए कितना तैयार है भारत


इमेज स्रोत, Getty Images
'हमें दिलचस्पी नहीं है'
लेकिन अमरीका के ह्यूस्टन में वैज्ञानिकों की एक टीम ने कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ टीका तैयार करने का काम नहीं छोड़ा था.
साल 2016 में वे लोग अपनी कोशिश में कामयाब हो गए और कोरोना वायरस का वैक्सीन तैयार कर लिया गया.
बेयलर कॉलेज ऑफ़ मेडिसीन के नेशनल स्कूल ऑफ़ ट्रॉपिकल मेडिसीन की को-डायरेक्टर डॉक्टर मारिया एलीना बोट्टाज़्ज़ी ने बीबीसी मुंडो से इस बारे में बात की.
उन्होंने बताया, "हमने ट्रायल्स ख़त्म कर लिए थे और वैक्सीन के शुरुआती उत्पादन प्रक्रिया के अहम पड़ाव से भी गुजर चुके थे."
डॉक्टर मारिया एलीना बोट्टाज़्ज़ी टेक्सास के बच्चों के हॉस्पिटल के वैक्सीन डेवलपमेंट सेंटर की को-डायरेक्टर भी हैं.
वो कहती हैं, "फिर हम एनआईएच (यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ) के पास गए और पूछा कि 'हम इस वैक्सीन को क्लीनिक तक जल्द पहुंचाने के लिए क्या कर सकते हैं?' और उन्होंने जवाब दिया, 'देखिए, फिलहाल हमें इसे दिलचस्पी नहीं' है."

इमेज स्रोत, ANNA GROVE PHOTOGRAPHY
जब ये महामारी ख़त्म हो गई...
ये टीका साल 2002 में फैली सार्स महामारी के ख़िलाफ़ तैयार किया गया था. चूंकि जिस देश (चीन) में इसकी शुरुआत हुई थी, उस पर वहां काबू पा लिया गया था, इसलिए इस वैक्सीन पर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिक और पैसा जुटाने की स्थिति में नहीं रह गए थे.
ऐसा नहीं है कि केवल कोरोना वायरस के टीके की खोज का काम रोक दिया गया था.
दुनिया भर के दर्जनों वैज्ञानिकों को अपनी रिसर्च सिर्फ इसलिए रोक देनी पड़ी कि उसमें लोगों की दिलचस्पी कम हो गई थी और रिसर्च के लिए पैसा जुटाना मुश्किल हो गया था.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेनसिलवेनिया में माइक्रोबॉयलॉजी की प्रोफ़ेसर सुजैन वीज़ कहती है कि सात-आठ महीने के बाद जब ये महामारी ख़त्म हो गई तो लोगों, सरकारों और दवा कंपनियों की कोरोना वायरस की स्टडी में दिलचस्पी तुरंत ख़त्म हो गई.
वो कहती हैं, "साथ ही सार्स का असर एशिया में ज़्यादा देखने को मिला. कनाडा में इसके संक्रमण के कुछ मामले मिले थे पर ये यूरोप तक नहीं पहुंच पाया जैसा कि इस बार कोरोना वायरस के साथ हुआ. इसके बाद मर्स वायरस आया लेकिन इसका असर मध्य पूर्व तक ही सिमटा रहा. फिर कोरोना वायरस और उसमें लोगों की दिलचस्पी ख़त्म होती चली गई. कुछ दिनों पहले तक यही स्थिति बनी रही. और मुझे सचमुच ऐसा लगता है कि हमें बेहतर रूप से तैयार रहना चाहिए था."

इमेज स्रोत, Getty Images
वैक्सीन तैयार हो जाता तो...
सार्स और मर्स के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि ये दोनों कोरोना वायरस के ख़तरे से आगाह करने वाली ऐसी चेतावनी थी, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए था और इसलिए इन पर रिसर्च जारी रखा जाना चाहिए था.
हालांकि डॉक्टर मारिया एलीना बोट्टाज़्ज़ी का वैक्सीन इस समय संक्रमण में प्रचलित कोरोना वायरस के लिए नहीं था बल्कि ये सार्स बीमारी के लिए था.
लेकिन विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि अगर वो वैक्सीन तैयार हो जाता भविष्य की महामारियों के लिए नए टीके का विकास ज़्याजा तेज़ रफ़्तार से किया जाना मुमकिन था.
येल यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ के प्रोफ़ेसर जैसन स्क्वॉर्ट्ज़ कहते हैं कि कोविड-19 की महामारी के ख़िलाफ़ तैयारियां साल 2002 की सार्स महामारी के वक़्त ही शुरू हो जानी चाहिए थी.
उन्होंने कहा, "अगर हमने सार्स वैक्सीन प्रोग्राम बीच में नहीं छोड़ा होता तो नए कोरोना वायरस पर रिसर्च करने के लिए हमारी पास काफी बुनियादी स्टडी उपलब्ध होती."
कोरोना परिवार का विषाणु
नया वायरस Sars-Cov-2 उसी कोरोना परिवार का विषाणु है जिसने साल 2002 में सार्स महामारी को जन्म दिया था.
डॉक्टर मारिया एलीना बोट्टाज़्ज़ी कहती हैं कि दोनों ही विषाणु आनुवांशिक रूप से 80 फ़ीसदी समान हैं.
"चूंकि उनकी वैक्सीन ने मंज़ूरी की शुरुआती प्रक्रिया पूरी हो गई थी, इसलिए नए कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ ये जल्दी ढल सकता था."
"हमारे पास इसके उदाहरण होते कि ऐसे वैक्सीन कैसा बर्ताव करते हैं और भले ही ये विषाणु अलग-अलग हों लेकिन वे आते तो एक वर्ग से हैं. हमारे पास इस बात का अनुभव होता कि समस्या की जड़ कहां हैं और उसे कैसे हल किया जा सकता है. क्योंकि हमने पहले ये देखा था कि क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत में सार्स वैक्सीन कैसे प्रतिक्रिया कर रहा था और हमें ये उम्मीद है कि नई वैक्सीन भी तकरीबन उसी तरह काम करती."
'ख़राब कारोबारी पेशकश'
अगर ये सभी जानकारियां अभी मौजूद हैं तो उस वक़्त कोरोना वायरस पर चल रहे रिसर्च क्यों रोक दिए गए? विशेषज्ञों का कहना है कि हर बात इस बात पर निर्भर करती है कि रिसर्च के लिए कितना पैसा मिल रहा है.
डॉक्टर मारिया कहती हैं, "हम सौ डॉलर या एक अरब डॉलर की बात नहीं कर रहे हैं. हम महज 30 से 40 लाख डॉलर की बात कर रहे हैं. 15 लाख डॉलर में हम इंसानों पर इस वैक्सीन के असर की क्लिनिकल स्टडी पूरी कर लेते. लेकिन उन्होंने ऐसे वक़्त में हमारा काम बंद कर दिया जब हम दिलचस्प नतीज़ों तक पहुंचने के क़रीब थे.
बॉयोटेक कंपनी आरए कैपिटल के निदेशक और वीरोलॉजिस्ट (विषाणु विशेषज्ञ) पीटर कोलचिंस्की बताते हैं, "चूंकि इस वैक्सीन के लिए कोई बाज़ार नहीं था, इसलिए इसके लिए पैसा देना बंद कर दिया गया. हकीकत तो ये है कि जब एक बाज़ार होता है तो इसका एक हल भी होता है. आज हमारे पास कोरोना वायरस के लिए सैंकड़ों वैक्सीन हैं लेकिन ये सभी सुअर, मुर्गे-मुर्गी और गाय जैसे जानवरों के लिए हैं."
ये वो वैक्सीन हैं जो पॉल्ट्री और पालतू पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए हैं क्योंकि इनका करोड़ों डॉलर का बाज़ार है. लेकिन इसके बावजूद ये सोचा गया कि इंसानों को अपना शिकार बनाने वाली कोरोना वायरस की महामारी पर काबू किया जा सकता है.
पीटर कोलचिंस्की कहते हैं, "समस्या ये है कि किसी भी कंपनी के लिए ऐसा कोई प्रोडक्ट तैयार करना एक ख़राब कारोबारी पेशकश है जिसका दशकों तक या फिर शायद कभी नहीं इस्तेमाल किया जाएगा. ये उस तरह की चीज़ है जिसपर सरकारों को निवेश करना चाहिए. अगर ये उनकी प्राथमिकता में होता तो मुझे कोई शक नहीं कि सरकारी एजेंसियों ने सार्स महामारी के वैक्सीन पर चल रही रिसर्च को पैसा देना जारी रखा होता. और तब शायद हम कोविड-19 के लिए बेहतर रूप से तैयार होते."
नई वैक्सीन
आज का सच तो यही है कि हमें कोविड-19 के लिए वैक्सीन चाहिए. इस बात की संभावना कम ही है कि आने वाले 12 से 18 महीनों में शायद ही ये तैयार हो पाए.
और तब तक कोरोना वायरस की महामारी पर शायद काबू ही पा लिया जाए. डॉक्टर मारिया और उनकी टीम 2016 में तैयार किए गए वैक्सीन के अपडेट पर काम कर रहे हैं ताकि कोविड-19 का नया टीका तैयार किया जा सके. लेकिन अभी भी रिसर्च के लिए पैसा जुटाने की मशक्कत उठानी पड़ रही है.
वो कहती हैं, "2016 की वैक्सीन के अपडेट के काम को तेज़ करने के लिए पैसा मिला है. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ ने भी चार लाख डॉलर की रकम दी है. लेकिन हमें इसे और तेज करने के लिए ज़्यादा पैसे की ज़रूरत है. लेकिन ये पूरी प्रक्रिया बहुत निराश करने वाली है"

- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- कोरोना वायरस क्या गर्मी से मर जाता है?
- कोरोना ठीक होने के बाद दोबारा हो सकता है?
- कोरोना वायरस का आपकी सेक्स लाइफ़ पर क्या असर पड़ेगा?
- कोरोना वायरस: पांच बीमारियां जिनके प्रकोप ने बदल दिया इतिहास
- इटली का वो अस्पताल जो 'कोरोना अस्पताल' बन गया है
- कोरोना वायरस का संकट कब और कैसे ख़त्म होगा?
- कोरोना वायरस से कैसे जूझ रहा है पाकिस्तान
- कोरोना वायरस: इटली के बाद इस यूरोपीय देश पर छाया संकट
- कोरोना वायरस की चपेट में एक ऐसा देश जो त्रासदी को छिपा रहा है
- कोरोना से निवेशकों में दहशत, 10 लाख करोड़ गंवाए
- कोरोना वायरस: मास्क पहनना चाहिए या नहीं?
- सबसे व्यस्त रेल नटवर्क को बंद करने से कितना असर होगा?
- कोरोना वायरस: इन मुल्कों से सीख सकते हैं भारत और बाक़ी देश
- कोरोना वायरस केवल मुसीबत लेकर नहीं आया है...
- 'कोरोना वायरस की भारत में सुनामी आने वाली है'


इमेज स्रोत, GoI

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)


















