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नवाज़ शरीफ़ को नज़रबंद किया गया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इस्लामाद में विशाल विरोध मार्च के मद्देनज़र पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ सहित कई नेताओं को नज़रबंद किया गया है. नवाज़ शरीफ़ के भाई और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एतज़ाज़ अहसन को भी नज़रबंद कर दिया गया है. इन नेताओं को लाहौर में उनके घरों पर नज़रबंद किया गया है. इन नेताओं को अपनी घोषणा के मुताबिक़ 'इस्लामाबाद लॉंग मार्च' का नेतृत्व करना था. बीबीसी संवाददाताओं के अनुसार विरोध मार्च को रोकने के लिए इस्लामाबाद को क़िले में बदल दिया गया है. संसद के सामने बाधाएं खड़ी कर दी गईं हैं और 'शाहरा-ए-दस्तूर' यानि राजमार्ग की सुरक्षा पाकिस्तान रेंजर के हवाले कर दी गई है. नज़रबंदी के आदेश साथ ही पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) पंजाब इकाई के अध्यक्ष ज़ुल्फ़िक़ार अली खोसा और ख़्वाजा सैयद को भी नज़रबंद करने के आदेश दिए गए हैं. पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के प्रवक्ता परवेज़ राशिद का कहना था कि सैकड़ों पुलिस वाले नवाज़ शरीफ़ के घर को घेरे खड़े हुए हैं. इसके पहले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी ने सरकार की पहल को ठुकरा दिया था. पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता ख्वाजा मोहम्मद आसिफ़ ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी का भरोसा राष्ट्रपति ज़रदारी से उठ गया है. पार्टी इसके पहले तीन बार अपना हाथ जला चुकी है. उनका कहना था कि राष्ट्रपति ज़रदारी से बातचीत नहीं हो सकती है. दूसरी ओर नवाज़ शरीफ़ ने शनिवार को एक रैली में कहा,'' सरकार मुझे गिरफ़्तार करे, नज़रबंद करे, पाबंदियाँ लगाए, ये लाँग मार्च नहीं रुकेगा और अंजाम तक पहुँच कर रहेगा.'' इसके पहले पाकिस्तान में चल रहे राजनीतिक संकट को सुलझाने के लिए सरकार ने पहल की थी. सरकार का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले की समीक्षा के लिए अपील करेगी जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और शाहबाज़ शरीफ़ को किसी भी निर्वाचित पद पर काम करने से रोक लगा दी गई थी. राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के प्रवक्ता फ़रतुल्लाह बाबर ने एक बयान में कहा, " पाकिस्तान सरकार नवाज़ शरीफ़ और शाहबाज़ शरीफ़ पर प्रतिबंध के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ समीक्षा याचिका दायर करेगी." सरकार की पहल बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गीलानी और राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के बीच बैठक में ये फ़ैसला हुआ. पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट ने 25 फरवरी को अपने फ़ैसले में पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ और उनके भाई शाहबाज़ शरीफ़ के किसी भी निर्वाचित पद पर काम करने से रोक लगा दी थी. राष्ट्रपति ज़रदारी और प्रधानमंत्री गीलानी के बीच इस बात पर भी सहमति हुई कि परवेज़ मुशर्रफ़ के शासनकाल के दौरान बर्ख़ास्त किए गए जजों की बहाली का मामला 'लोकतंत्र के चार्टर' के तहत हल किया जाएगा. उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ज़रदारी की पत्नी बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़ ने वर्ष 2006 में इस चार्टर पर हस्ताक्षर किया था. दोनों नेताओं ने यह वादा किया था कि देश में लोकतंत्र बहाल किया जाएगा, टकराव से बचने की कोशिश होगी और राजनीति में सेना की भूमिका को ख़त्म किया जाएगा. पाकिस्तान में इस समय विरोध प्रदर्शनों का दौर चल रहा है और वहाँ की स्थिति काफ़ी तनावपूर्ण बनी हुई है. देशभर में वकील और राजनीतिक कार्यकर्ता ये मांग कर रहे हैं बर्ख़ास्त किए गए जजों को बहाल किया जाए. नवाज़ शरीफ़ की पार्टी भी इस मांग का समर्थन कर रही है. विरोध मार्च के आयोजक 16 मार्च को राजधानी इस्लामाबाद में महारैली और संसद के बाहर धरना देना चाहते हैं. सरकार इस विरोध प्रदर्शन को रोकने की कोशिश कर रही है. |
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