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'लॉन्ग मार्च' के दौरान कई गिरफ़्तार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में गुरुवार से विपक्षी दलों के सरकार विरोधी मार्च के मद्देनज़र एक साल पहले सत्ता में आई लोकतांत्रिक सरकार के सामने राजनीतिक संकट पैदा हो गया है. वकीलों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने सरकारी की तरफ़ से राजनीतिक सभाओं और रैलियों की पाबंदी के बावजूद चार दिनों का 'लॉन्ग मार्च' शुरू कर दिया. ये कार्यकर्ता बसों और कारों से राजधानी इस्लामाबाद की तरफ़ बढ़ रहे हैं ताकि पाकिस्तानी संसद के सामने धरने पर बैठ सकें. दूसरी ओर सरकार ने राजनीतिक रैलियों को रोकने के लिए देशभर में सैकड़ों राजनीतिक और समाजिक कार्यकर्ताओं सहित वकीलों को हिरासत में लिया है. लौंग मार्च के ख़िलाफ़ नहीं पाकिस्तान में आंतरिक सुरक्षा मामलों के प्रमुख रहमान मलिक ने संसद में कहा कि वे 'सैद्धांतिक रूप से लौंग मार्च के ख़िलाफ़ नहीं है, लेकिन चरमपंथी कार्रवाई के मद्देनज़र वकीलों को शाहरा-ए-दस्तूर पर धरने की इजाज़त नहीं दी जा सकती है'. इस विरोध मार्च को पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) सहित कई अन्य राजनीतिक पार्टियों का समर्थन प्राप्त है. मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेतृत्व में क्वेटा, कराची और लाहौर से 'लौंग मार्च' में भाग ले रहे राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ वकील भी इस्लामाबाद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन पाकिस्तान में अनेक जगहों पर इन लोगों की धरपकड़ और गिरफ़्तारी हो रही है. कई नेता भूमिगत हो गए हैं. इससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध बढ़ रहा है. केवल कराची में 80 से अधिक वकीलों और कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया है. लेकिन बलोचिस्तान से किसी की गिरफ़्तारी की कोई ख़बर नहीं है. विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं का मार्च 16 मार्च को इस्लामाबाद में ख़त्म होना है. इसके बाद उनकी इस्लामाबाद में अनिश्चितकाल के लिए धरना देने की योजना है जिससे कारण सरकार के साथ टकराव की स्थिति पैदा होने की आशंका है. पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनके भाई और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ को निर्वाचित पद पर आसीन होने के अयोग्य ठहराए जाने के सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले के बाद ये घटनाक्रम शुरू हुआ है. पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के कुछ फ़ैसलों और वर्ष 2007 में निलंबित किए गए जजों की बहाली की मांग पर इन विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया है. राजनीतिक तनातनी के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा है, "गवर्नर शासन लागू करने के फ़ैसले की आलोचना हुई है. हम इसे लंबा नहीं खींचना चाहते और जल्दी ख़त्म करना चाहते हैं." उधर भारत ने सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति में पाकिस्तान में स्थिति पर चिंता जताई है. भारतीय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है, "भारत सुरक्षा के मुद्दे पर चिंतित है. हम चाहते हैं कि सभी पड़ोसी देशों में शांति कायम हो. हमें उम्मीद है कि ये मुद्दे उनकी अपनी प्रक्रिया के तहत सुलझा लिए जाएँगे. पाकिस्तान की ज़मीन से आतंकवादी गतिविधियों को होते देख ये ज़्यादा ज़रूरी है कि वहाँ एक ज़िम्मेदार सरकार हो जो इनका सामना करने में सक्षम हो." अनेक गिरफ़्तारियाँ, निषेधाज्ञा लागू
पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने बुधवार को एबटाबाद में एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए कहा, "यह पाकिस्तान के लिए निर्णायक क्षण है. ये पाकिस्तान को बचाने का अवसर है. आप वादा कीजिए कि पाकिस्तान के अस्तित्व की लड़ाई आप लड़ेंगे." पाकिस्तान में 'लौंग मार्च' को देखते हुए राजनीतिक नेताओं, वकीलों और राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं की धरपकड़ जारी है और गिरफ़्तारियाँ हो रही हैं. क्रिकेटर से राजनीतिक नेता बने इमरान ख़ान भूमिगत हैं. सिंध और पंजाब प्रांतों में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है और राजनीतिक रैलियों पर प्रतिबंध लगाया गया है. सरकार का कहना है कि पीएमएल (नवाज़) और अन्य लोगों के प्रदर्शनों की कार्रवाई देश में लोकतांत्रिक तौर पर निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने की कोशिश है. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी नेता और केंद्र सरकार में सूचना मंत्री शैरी रहमान ने विपक्ष के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है, "हमारी लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार है...हम कई बलिदान देकर यहाँ तक पहुँचे हैं...हमने लोकतंत्र पर कभी समझौता नहीं किया और किसी लोकतांत्रिक सरकार के ख़िलाफ़ कभी बग़ावत नहीं की है. लेकिन सिंध और पंजाब में क़ानून व्यवस्था कायम रखना ज़रूरी है." टकराव के बीच, संयम की सलाह पाकिस्तान से बीबीसी संवाददाता एहतशामुल हक़ ने बताया है, "कल शरीफ़ बंधुओं की बहुत बड़ी रैलियाँ हुई हैं जिन्हें देखकर लगता है कि लोगों का मत नवाज़ शरीफ़ के साथ है. राष्ट्रपति की छवि को उन आरोपों से नुक़सान पहुँचा है जिनमें कहा गया कि उन्होंने न्यायपालिक के बारे में किए गए वादों को नहीं निभाया." बीबीसी संवाददाता का मानना है कि सत्ताधारी पक्ष ख़ासे दबाव में है और 16 मार्च के बाद हालात और ख़राब हो सकते हैं. बीबीसी संवाददाता एहतशामुल हक़ का कहना है, "सेना अध्यक्ष की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मुलाक़ात हुई है और माना जा रहा है कि सरकार से कहा गया है कि वह टकराव की नीति न अपनाए और बातचीत से ही समस्या को हल करे." उनका कहना है, "महत्वपूर्ण ये भी है इस्लामाबाद में ब्रितानी उच्चायुक्त ने प्रधानमंत्री गिलानी से बुधवार को मुलाकात की है और अमरीकी राजदूत तो लगातार उनके संपर्क में हैं." | इससे जुड़ी ख़बरें पाकिस्तान में विरोधियों की गिरफ़्तारी11 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान सरकार की शरीफ़ को चेतावनी09 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस 'तालेबान से कोई समझौता नहीं'04 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस पाक पंजाब में नवाज़ समर्थकों के प्रदर्शन26 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान में प्रदर्शन, नवाज़ के तेवर तीखे26 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'शरीफ़ नहीं लड़ सकते हैं चुनाव' 25 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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