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बुधवार, 11 मार्च, 2009 को 19:10 GMT तक के समाचार
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गिलानी ने की तनाव घटाने की कोशिश
पाकिस्तान में विरोध

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा है कि वह पंजाब प्रांत में राज्यपाल शासन ख़त्म करना चाहते हैं.

इस बीच पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेता नवाज़ शरीफ़ ने राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी को फिर आड़े हाथों लिया है.

उन्होंने ज़रदारी के कुछ फ़ैसलों और वर्ष 2007 में निलंबित किए गए जजों की बहाली की माँग पर विरोध प्रदर्शन जारी रखने का फ़ैसला किया है.

इसके तहत विपक्षी दलों और सरकार से नाराज़ वकीलों ने गुरूवार 12 मार्च से विभिन्न शहरों में रैलियाँ कर इस्लामाबाद की ओर कूच करने की घोषणा की है.

लेकिन सरकार ने इसकी इजाज़त न देते हुए सैंकड़ों लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है और पंजाब और सिंध प्रांत में रैलियों पर रोक लगा दी है.

 यह पाकिस्तान के लिए निर्णायक क्षण है. ये पाकिस्तान को बचाने का अवसर है. आप वादा कीजिए कि पाकिस्तान के वजूद की लड़ाई आप लड़ेंगे
नवाज़ शरीफ़

प्रधानमंत्री ने बुधवार शाम नवनिर्वाचित सीनेटरों को संबोधित करते हुए माना कि पंजाब में राज्यपाल शासन लागू करना अलोकप्रिय साबित हुआ है.

इस बीच सेना प्रमुख अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी ने उनसे मुलाक़ात की है और इसे काफ़ी अहमियत दी जा रही है.

गिलानी की पहल

राष्ट्रपति और नवाज़ शरीफ़ के बीच जारी खींचतान के बीच प्रधानमंत्री गिलानी ने पंजाब से राज्यपाल शासन ख़त्म करने की इच्छा जताई है.

उन्होंने सीनेटरों से कहा, "राज्यपाल शासन लागू करने के फ़ैसले की काफ़ी आलोचना हुई है. हम इसे लंबा नहीं खींचना चाहते और जल्दी से जल्दी ख़त्म करना चाहते हैं."

पुलिस ने रैली के मद्देनज़र गिरफ़्तारियाँ शुरु कर दी है

उनका कहना था, "कल राष्ट्रपति ईरान से लौटेंगे और मैं उनसे अनुरोध करुंगा कि सदन इस पर फ़ैसला करे और पंजाब में जिस पार्टी को बहुमत है वो सरकार बनाए."

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने नवाज़ शरीफ़ और पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री और उनके भाई शाहबाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ किसी निर्वाचित पद पर आसीन होने पर पाबंदी लगा दी गई थी.

इसके बाद राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने शाहबाज़ शरीफ़ को हटा कर वहाँ राज्यपाल शासन लागू कर दिया था.

दोनों नेताओं ने आरोप लगाया था कि इन फ़ैसलों के पीछे राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी का हाथ है जिन्होंने उन्हें अपने रास्ते से हटाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया.

'निर्णायक क्षण'

इस बीच पीएमएलएन नेता नवाज़ शरीफ़ ने सूबा सरहद में एक रैली को संबोधित करते हुए सरकार के ख़िलाफ़ प्रस्तावित मुहिम जारी रखने की घोषणा की.

वकीलों ने फिर आंदोलन का रुख़ किया है

उन्होंने रैली में आए लोगों से कहा, "यह पाकिस्तान के लिए निर्णायक क्षण है. ये पाकिस्तान को बचाने का अवसर है. आप वादा कीजिए कि पाकिस्तान के वजूद की लड़ाई आप लड़ेंगे."

उनकी मुख्य माँग ये है कि वर्ष 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के आदेश से निलंबित किए गए मुख्य न्यायाधीश राव इफ़्तिख़ार चौधरी और अन्य न्यायाधीशों को बहाल किया जाए.

नवाज़ शरीफ़ ने इससे पहले राष्ट्रपति ज़रदारी की तुलना परवेज़ मुशर्रफ़ से करते हुए उन्हें भी तानाशाह बताया था.

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