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करकरे पर अंतुले के बयान से बवाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के भारतीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री एआर अंतुले के मीडिया को दिए एक बयान पर उस समय विवाद खड़ा हो गया जब उन्होंने मुंबई आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे की मौत की परिस्थितियों पर हैरानी जताई. उन्होंने मीडिया से कहा, "मेरी समझ में नहीं आया कि मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के दौरान आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे समेत तीन बड़े पुलिस अधिकारी ताज या ऑबराय होटलों की तरफ़ जाने की जगह उस ओर क्यों जा रहे थे जहाँ कुछ हो ही नहीं रहा था." उन्होंने ये भी कहा कि जो कोई भी सच्चाई तक पहुँचने की कोशिश कर रहा होता है, वह मौत का शिकार क्यों बन जाता है. जाँच की माँग इस पर आपत्ति जताते हुए भाजपा नेता राजीव प्रताप सिंह रूडी ने कहा, "हम प्रधानमंत्री से ये जानना चाहते हैं कि क्या अंतुले जी के व्यक्तिगत विचार हैं या फिर ये पूरे मंत्रिमंडल की सोच है. इस पर प्रधानमंत्री को बयान देना चाहिए." इसके बाद ये मामला संसद में भी उठा जहाँ अंतुले ने वही कहा जो उन्होंने मीडिया से कहा था. विपक्ष, ख़ास तौर पर भाजपा के सांसदों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई. अंतुले ने अपनी सफ़ाई देते हुए कहा कि वे इस मामले पर हैरानी जता रहे हैं कि तीनों आला अधिकारी एक ही वाहन में बैठकर उस ओर क्यों जा रहे थे जिस ओर कुछ ख़ास हो ही नहीं रहा था. उन्होंने पूरे मामले में जाँच कराए जाने की माँग की है. इससे पहले मुंबई पुलिस प्रमुख कह चुके हैं कि हेमंत करकरे के अलावा मुठभेड़ के विशेषज्ञ विजय सालस्कर और एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अशोक काम्ते एक वाहन में जा रहे थे जब चरमपंथियों ने उन पर गोलियाँ चलाईं जिनके कारण तीनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. |
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