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संदिग्ध हमलावर के बचाव पर बवाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई के संदिग्ध हमलावर मोहम्मद अजमल आमिर कसाब का अदालत में बचाव का मुद्दा जटिल होता जा रहा है. शिव सेना कार्यकर्ताओं ने रविवार को प्रसिद्ध वकील अशोक सरोगी के घर पर प्रदर्शन और नारेबाज़ी की, उन्होंने अजमल कसाब का अदालत में प्रतिनिधित्व करने की बात कही थी. इसके बाद सरोगी ने एक लिखित बयान देकर कहा है कि वो कसाब का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे और उनके बयान का ग़लत अर्थ निकाला गया. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा,'' कुछ ग़लतफहमी हुई है. मैंने कहा था कि अगर किसी वकील की मौजूदगी के बिना अदालत की कार्रवाई पूरी नहीं होती हो, तो ज़रूरत पड़ने पर मैं स्वयं पेश होने के लिए तैयार हूँ ताकि मुक़दमे में रुकावट न आए और कसाब को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले.'' दूसरी ओर एक अन्य वकील महेश देशमुख को कथित शिवसैनिकों का गुस्सा झेलना पड़ा और उनके घर जमकर तोड़फोड़ और नारेबाज़ी की गई. बार एसोसिएशन का फ़ैसला इसके पहले मुंबई की लगभग एक हज़ार सदस्यों वाली बार एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित कर कसाब का बचाव न करने का निर्णय लिया था. इसकी वजह से मुंबई का कोई भी वकील कसाब की तरफ से कोर्ट में केस लड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहा है. जब 11 दिसंबर को कसाब को दो सप्ताह की पुलिस रिमांड पर लेना था, तो क़ानूनी सहायता पैनल ने एक वकील से उनके बचाव में उपस्थित रहने को कहा लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था. दिनेश मोटा का कहना है कि उन्होंने नैतिक आधार पर ऐसा किया. उनका कहना था,'' भले ही मेरा लाइसेंस निरस्त हो जाए, मैं उनका बचाव नहीं करूँगा. मुझे लगता है कि जैसे उन्होंने मेरे परिवारजनों की हत्या की हो. जब उन्होंने छत्रपति शिवाजी स्टेडियम में भारतीयों पर गोली चलाई तो मुझे लगा कि उन्होंने मेरे परिवार पर गोलीबारी की हो.'' लेकिन कोई भी भारतीय या विदेशी यदि निजी वकील नहीं रख पाता है तो उसे मुफ़्त क़ानूनी सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है. भारतीय संविधान ने ये अधिकार हर शख्स ने दे रखा है. ख़बरों के अनुसार मुंबई बार एसोसिएशन के फ़ैसले के बावजूद पूर्व अतिरिक्त एडवोकेट जनरल पी जनार्दन ने घोषणा की है कि अगर पाकिस्तान उच्चायुक्त उनसे संपर्क करेगा, तो वे कसाब का मुक़दमा लड़ने को तैयार हैं. मोहम्मद अजमल आमिर कसाब के रिमांड पर 24 दिसंबर को फिर सुनवाई होनी है, देखना है उस वक्त कोई वकील उनके बचाव में खड़ा होता है या नहीं. |
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