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मुंबई हमलों के लिए प्रधानमंत्री की माफ़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुंबई हमलों के मामले में पूरे देश से माफ़ी मांगते हुए कहा है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की प्रतिबद्धता जताई. मुंबई हमलों पर लोकसभा में हुई बहस में हस्तक्षेप करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान ने लश्कर से जुड़े संगठन जमात उद दावा के प्रमुख हाफ़िज़ मोहम्मद सईद के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है लेकिन पाकिस्तान को अभी और भी 'बहुत कुछ' करना होगा ताकि दुनिया को उसकी गंभीरता का अहसास हो. प्रधानमंत्री का कहना था, ''मैं पूरे देश से माफ़ी मांगता हूं क्योंकि हम इस तरह की घटना को रोकने में असफल रहे. '' उन्होंने मुंबई हमलों का हवाला देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को इस तरह के हमलों से बचाने के लिए दुरुस्त करने की ज़रुरत है. प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने इसके लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी का गठन करने, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्डों का विकेंद्रीकरण करने, समुद्री सुरक्षा बढ़ाने और वायु सेना के ज़रिए चौकसी को बढ़ाने का निर्णय किया है. मनमोहन सिंह का कहना था कि पाकिस्तान 'आतंकवाद का केंद्र' बन चुका है और वहां आतंकियों के लिए मौजूद आधारभूत ढांचे को तोड़ने की ज़रुरत है. उनका कहना था कि भारत 'मात्र आश्वसान से संतुष्ट नहीं होगा.' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने अभी तक 'अत्यधिक संयम' का परिचय दिया है लेकिन इसे 'भारत की कमज़ोरी' न समझा जाए. उन्होंने मुंबई हमलों को सुनियोजित और ख़तरनाक षडयंत्र क़रार देते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों को जब तक सज़ा नहीं मिलती तब तक ऐसी घटनाएं रुकेंगी नहीं. प्रधानमंत्री ने जमात उद दावा और उसके प्रमुख हाफ़िज़ सईद पर प्रतिबंध लगाने के संयुक्त राष्ट्र के फ़ैसले का स्वागत किया और कहा कि भारत ऐसे ही क़दमों का इंतज़ार कर रहा है. उनका कहना था कि पाकिस्तान को मुंबई हमलों को अंजाम देने वालों के ख़िलाफ़ अत्यंत कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि विश्व समुदाय को लगे कि पाकिस्तान ने जो क़दम उठाए हैं वो प्रभावी हैं. उनका कहना था कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचे का टूटना पूरी दुनिया के साथ साथ पाकिस्तान के हित में भी है. |
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