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'मुंबई हमले की चेतावनी दी गई थी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी मीडिया में ख़बरें आ रही हैं कि अमरीका ने भारत को मुंबई में हुए हमलों के बारे में पूर्व सूचना और चेतावनी दी थी. कुछ अमरीकी रक्षा और ख़ुफ़िया अधिकारियों ने सीएनएन और एबीसी टीवी नेटवर्क को दिए गए इंटरव्यू में ऐसी बातें कही हैं. अमरीकी समाचार चैनल सीएनएन को एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि "हमें ऐसी सूचना मिली थी कि आतंकवादियों का एक गुट समुद्र के रास्ते मुंबई में हमले कर सकता है जिसकी सूचना हमने भारत के अधिकारियों को दी थी." अमरीकी टीवी चैनल एबीसी न्यूज़ चैनल ने एक भारतीय अधिकारी के हवाले से कहा है कि 18 नवंबर को सेटेलाइट फ़ोन पर एक बातचीत सुनी गई थी जिससे समुद्री रास्ते से हमले के संकेत मिलते थे. सीएनएन का दावा है कि कुछ भारतीय अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि अमरीकी एजेंसी (सीआईए) ने समुद्री रास्ते से हमले की सूचना दी थी जिसके बाद सुरक्षा एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी गई थी और कुछ समय बाद उसका स्तर घटा दिया गया. अमरीकी जाँच एजेंसी एफ़बीआई के अधिकारी इस समय अपने जाँच उपकरणों के साथ भारत में हैं और वे पड़ताल में भारतीय अधिकारियों की मदद कर रहे हैं. इस बीच मुंबई के पुलिस कमिश्नर हसन गफ़ूर ने कहा, "हमें कोई पक्की सूचना नहीं मिली थी बल्कि एक एलर्ट जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि ताज होटल जैसे ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है." गफ़ूर ने कहा, "कुल दस आतंकवादी और सभी पाकिस्तान के शहर कराची से मुंबई आए थे, जिनमें से नौ मारे गए हैं और एक पुलिस की हिरासत में है." भारत के नौसेना प्रमुख ने भी स्वीकार किया है कि भारतीय जलसीमा की रखवाली में 'कमियाँ' रह गईं थीं. एडमिरल सुरेश मेहता ने माना है कि ख़ुफ़िया जानकारी की साझेदारी और समुद्री सीमा की पहरेदारी की "व्यवस्था में कुछ गड़बड़ियाँ हैं". एडमिरल मेहता ने मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्हें आश्वस्त किया इस बारे में सरकार पर्याप्त क़दम उठाएगी और व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी. एडमिरल मेहता ने कहा, "इस तरह के गंभीर मामलों में कई एजेंसियाँ शामिल होती हैं और उनके बीच समन्वय सबसे अहम होता है, हमें ऐसी स्पष्ट जानकारी समय पर मिलनी चाहिए ताकि हम ठोस कार्रवाई कर सकें." इस तरह की ख़बरों से पहले ही बुरी तरह नाराज़ जनता का ग़ुस्सा और भड़कने की आशंका है. |
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