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'शांति प्रक्रिया को जारी रखना मुश्किल' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी का कहना है कि पाकिस्तान स्थित चरमपंथी तत्व मुंबई जैसे हमले करते रहे तो द्विपक्षीय संबधों को आगे बढ़ाना असंभव हो जाएगा. एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि मुंबई हमलों के बाद शांति प्रक्रिया जारी रखना मुश्किल होगा. उनका कहना था,'' हमारा इरादा शांति प्रक्रिया को समाप्त करने का नहीं है लेकिन दूसरे पक्ष ने इन घटनाओं पर उचित कार्रवाई नहीं की तो काम करना मुश्किल होगा और इसमें शांति प्रक्रिया भी शामिल है.'' लेकिन दिल्ली में भारत-अरब फोरम की बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत में प्रणव मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि मुंबई हमले में पाकिस्तानी तत्वों का हाथ होने की आशंका के बाद भी भारत पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई करने पर विचार नहीं कर रहा है. दूसरी ओर पाकिस्तान ने मुंबई धमाकों की जांच उच्चस्तरीय जांच का प्रस्ताव रखा है. इसके पहले प्रणव मुखर्जी ने स्पष्ट किया था कि मुंबई चरमपंथी हमलों में पाकिस्तानी तत्वों का हाथ है. उन्होंने पाकिस्तान से कहा था कि वह चरमपंथ के ढाँचे को नष्ट करने के अपने वादे को पूरा करे. भारतीय विदेश मंत्री का कहना था कि पाकिस्तान ने दो बार वादा किया था कि उसकी ज़मीन का इस्तेमाल चरमपंथी गतिविधियों में नहीं किया जाएगा. उनका कहना था कि 2004 में जब परवेज़ मुशर्रफ़ पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे और अटलबिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री थे, उस दौरान उन्होंने ये वादा किया गया था. दूसरी बार 24 सितंबर, 2008 को जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से न्यूयॉर्क में मिले तो संयुक्त बयान जारी किया गया था और इसमें भी ये वादा किया गया था. |
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