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'वे हमारी ज़मीन में दफ़न नहीं हो सकते' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई के हमलों के बाद हुई मुठभेड़ में मारे गए नौ चरमपंथियों को मुंबई के मुसलमानों ने कब्रिस्तान में दफ़न करने से मना कर दिया है. मुंबई में मुसलमानों के संगठन मुस्लिम काउंसिल ने कहा कि इन लोगों को भारत की ज़मीन पर या मुसलमानों के कब्रिस्तान में दफ़न नहीं किया जाना चाहिए. भारत के मुसलमानों ने इन हमलों के प्रति अपनी नाराज़गी ज़ोरदार तरीक़े से प्रकट की है, भारत के मुसलमान आतंकवाद के ख़िलाफ़ फ़तवे तो जारी करते रहे हैं लेकिन यह पहला मौक़ा है जब उन्होंने चरमपंथियों को दफ़न करने से इनकार किया है. मुस्लिम काउंसिल के प्रमुख इब्राहीम ताय कहते हैं कि इस तरह के हमले करने वाले मुसलमान नहीं हो सकते इसलिए उन्हें मुसलमानों के कब्रिस्तान में जगह नहीं दी जानी चाहिए. इब्राहीम ताय ने कहा, "वो मुसलमान हो ही नहीं सकते, जो इस्लाम के क़ायदे-क़ानूनों को नहीं मानता वह मुसलमान कैसे हो सकता है लिहाज़ा हम ये चाहते हैं कि इन्हें मुसलमानों के किसी भी कब्रगाह में दफ़न न किया जाए." मुंबई के चरमपंथी हमले में नौ हमलावर मारे गए थे और उनका एक साथी अजमल अमीर क़साब गिरफ़्तार किया गया था, उसने पुलिस को बताया कि मारे गए सभी लोग मुसलमान थे. मुस्लिम काउंसिल के महासचिव सरफ़राज़ आरज़ू ने बताया कि इस फ़ैसले की सूचना अधिकारियों को दे दी गई है. वे कहते हैं, "इन्होंने इस्लाम की सभी शिक्षाओं को उलट कर रख दिया है, हमारी ज़मीन पर इनके दफ़न होने की कोई गुंजाइश नहीं है." मुंबई में पाई गई मुसलमानों की लावारिस लाशों या पुलिस मुठभेड़ में मारे गए मुसलमानों के शवों को आम तौर पर मरीन लाइंस कब्रिस्तान में दफ़न किया जाता है. इस मामले में ऐसा लगता है कि पुलिस के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है जिसका आसान समाधान दिखाई नहीं दे रहा है. |
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