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मंगलवार, 02 दिसंबर, 2008 को 07:42 GMT तक के समाचार
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'महज़ इस्तीफ़ों से नहीं सुधरेगी छवि'

मुंबई हादसा
मुंबई के आम लोगों में नेताओं के प्रति हताशा और खिन्नता है.
मुंबई में पिछले सप्ताह के तबाही के मंज़र के बाद पूरे शहर में चरमपंथ की इस बड़ी घटना को लेकर चिंता, भय और नाराज़गी का माहौल है.

पर इसके अलावा जिस एक तबके को सबसे ज़्यादा विरोध का सामना करना पड़ रहा है वह है नेताओं का. चरमपंथ के मसले पर शायद पहली बार इतना मुखर होकर लोग राजीनतिक नेताओं और उनकी बयानबाज़ियों, गतिविधियों से इतने नाराज़ और खिन्न नज़र आ रहे हैं.

ऐसा केवल मंचों, प्रदर्शनों के ज़रिए नहीं हुआ है, निजी स्तर पर लोगों ने राजनीतिक नेताओं का बहिष्कार किया है. उन्हें असंवेदनशील और स्वार्थी कहा है.

तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, महाराष्ट्र के गृहमंत्री आरआर पाटिल, मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, केरल के मुख्यमंत्री अच्युतानंदन सहित कुछ नेताओं को लोगों की ओर से कड़ा विरोध झेलना पड़ा है.

मुंबई के आम लोगों से इस बारे में सवाल करने पर उनके अंदर का आक्रोश फूट पड़ा. उनके पास नेताओं के प्रति हताशा और खिन्नता भरी प्रतिक्रियाएं हैं.

मृत्यु पर सियासत

चरमपंथियों से मुठभेड़ में मारे गए आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे के परिवार से मिलने पहुँचे गुजरात के मुख्यमंत्री को कुछ ऐसी ही स्थितियों का सामना करना पड़ा.

मुंबई का विरोध
निजी स्तर पर लोगों ने राजनेताओं का बहिष्कार किया है

परिवार के लोगों ने राहत राशि लेने से भी मना कर दिया. कारण, पिछले दिनों नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साध्वी प्रज्ञा मामले में दिए गए बयान बने.

इसी तरह मुंबई में कमांडो कार्रवाई के दौरान मारे गए केरल मूल के कमांडो उन्नीकृष्णन के घर पहुँचे केरल के मुख्यमंत्री को उन्नीकृष्णन ने वहाँ से वापस जाने के लिए विवश कर दिया.

मारे गए कमांडो के पिता अपने बेटे की मौत पर किसी तरह की सियासत नहीं चाहते हैं और उनके मुताबिक दरवाज़े आकर आंसू गिराने के पीछे निजी राजनीतिक लाभ पाना निहित है.

मारे गए पुलिस अधिकारियों की अंत्येष्टि में पहुँचे राज्य सरकार के नेताओं के बारे में भी अधिकतर लोगों की यही राय सामने आ रही है.

मराठा प्रेम गायब

बंगलौर और देहरादून के एनएसजी जवानों की मौत, अधिकतर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के युवाओं वाली एनएसजी के ज़रिए चरमपंथियों पर जीत, और वहीं शिवराज पाटिल से आरआर पाटिल जैसे महाराष्ट्र मूल के नेताओं पर लगे लापरवाही के आरोपों के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का मराठा मानुष का सवाल मुंबई की सड़कों से फिलहाल ग़ायब दिख रहा है.

सबसे ज़्यादा नाराज़गी तो है मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख से. उनकी बातों, बयानों और फिर ब़ॉलीवुड के चेहरों को ताज की परेड कराने ने घाव पर नमक का काम किया.

हालांकि महाराष्ट्र में ही राजनीतिक रूप से सक्रिय लोगों से जब जनविरोध की वजह पूछी तो पहले तो उन्होंने कहा कि ऐसा मीडिया के प्रचार की वजह से हो रहा है, व्यक्ति विशेष को दोष देने के बजाय व्यवस्था में सुधार की दुहाई दी और आक्रोश को स्वीकार भी किया.

स्पष्ट है कि नेताओं के राजनीतिक सामाजिक चरित्र पर उठ रही उंगलियाँ राजनीति के और हल्के स्तर पर जाने का विरोध हैं और इसकी भरपाई इस्तीफ़ों से नहीं हो सकती.

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