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शिवराज पाटिल ने इस्तीफ़ा सौंपा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के लिए नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए भारत के गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. उनकी जगह अब तक वित्त मंत्रालय संभाल रहे पी चिदंबरम लेंगे. समाचार माध्यमों के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन के भविष्य के बारे अटकलें लगाई जा रही हैं. उनके इस्तीफ़ा देने या फिर उसके स्वीकार होने या न होने पर परस्पर विरोधी बयान आ रहे हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया प्रभारी वीरप्पा मोइली ने बीबीसी से हुई बातचीत में शिवराज पाटिल के इस्तीफ़े की पुष्टि की है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को दिल्ली में सर्वदलीय बैठक बुलाई है और इससे पहले ही इस्तीफ़े की ख़बर आई है. इससे पहले शनिवार की रात कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी नेताओं ने जिस तरह से शिवराज पाटिल के प्रति नाराज़गी जताई थी उसके बाद उन पर इस्तीफ़ा देने का दबाव बढ़ गया था. माना जा रहा है कि इसी तरह का दबाव महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख और गृह मंत्री आरआर पाटिल पर भी है. मुंबई में 26 नवंबर की रात से शुरु हुए चरमपंथी हमले शनिवार को ख़त्म हुए जब कमांडो और सुरक्षाकर्मियों ने ताज होटल को चरमपंथियों के कब्ज़े से मुक़्त करवा लिया था. इन हमलों में कम से कम 195 लोगों की मौत हुई है जिसमें सुरक्षाकर्मी और विदेशी नागरिक शामिल हैं. तीन सौ से अधिक लोग घायल भी हुए हैं. केंद्र और महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि इन हमलों के पीछे पाकिस्तान का हाथ होने के सबूत मिले हैं. हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इस बात का खंडन किया है लेकिन हमलों की जाँच में हर तरह का सहयोग देने की बात कही है. इस्तीफ़ा ख़बरें मिली हैं कि रविवार को सुबह शिवराज पाटिल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलकर अपना इस्तीफ़ा सौंपा. पिछले छह महीने में देश में हुए छह बड़े चरमपंथी हमलों के बाद शिवराज पाटिल के कामकाज के ढंग पर सवाल उठाए जा रहे थे. मुंबई में हुए हमले सबसे ताज़ा हमले हैं.
सितंबर में दिल्ली में हुए सिलसिलेवार बम हमलों के बाद शिवराज पाटिल के कामकाज के ढंग पर बड़े सवाल उठाए गए थे और उस समय भी उन पर पद छोड़ने का दबाव बना था. ख़बरें हैं कि शनिवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों को लेकर शिवराज पाटिल के ख़िलाफ़ बड़ी नाराज़गी जताई थी. ज़्यादातर सदस्यों ने केंद्रीय गृहमंत्रालय और गृहमंत्री शिवराज पाटिल के कामकाज पर कड़ी टिप्पणियाँ की थी. इस बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के प्रति भी नाराज़गी जताई गई. हालांकि यह पहला मौक़ा नहीं था जब गृहमंत्रालय के कामकाज पर कड़ी टिप्पणियाँ की गई हैं. पिछले हफ़्ते जब राज्य के आला पुलिस अधिकारियों, केंद्रीय गृहमंत्रालय और ख़ुफ़िया एजेंसियों के आला अधिकारियों की एक बैठक में प्रधानमंत्री ने कड़ी टिप्पणियाँ की थीं. हालांकि उन्होंने शिवराज पाटिल पर सीधी कोई टिप्पणी नहीं की थी लेकिन उन्होंने मंत्रालय और उसके अंतर्गत काम करने वाले विभागों की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया था. रविवार को दोपहर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने बीबीसी से इस्तीफ़े की पुष्टि करते हुए कहा है कि शिवराज पाटिल ने मुंबई में हुए हमलों की 'नैतिक ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए' अपना इस्तीफ़ा प्रधानमंत्री को भेज दिया है. अभी प्रधानमंत्री ने शिवराज पाटिल का इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं किया है. बैठक में नहीं मुंबई के चरमपंथी हमलों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की समीक्षा करने के लिए शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सेना और गृहमंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक बुलाई थी. कोई ढाई घंटे चली इस बैठक में रक्षामंत्री एके एंटनी, सेनाध्यक्ष दीपक कपूर, नौसेना प्रमुख एडमिरल सुरेश मेहता और वायुसेना प्रमुख एयरमार्शल होमी मेजर, कोस्टगार्ड के महानिदेशक आरएफ़ कॉन्ट्रैक्टर, गृहमंत्री मधुकर गुप्ता, रक्षा सचिव विजय सिंह और ख़ुफ़िया विभाग (आईबी) के प्रमुख पीसी हाल्दार मौजूद थे. इस बैठक में एनएसजी कमांडो, सेना के जवानों, नौसेना के कमांडो और मुंबई पुलिस की कार्रवाइयों की समीक्षा की गई. समाचार एजेंसियों के अनुसार इस बैठक में गृहमंत्री शिवराज पाटिल और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन मौजूद नहीं थे. हालांकि इससे पहले शिवराज पाटिल ने शनिवार की सुबह अपने निवास पर सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख लोगों की एक बैठक की थी. उस बैठक में सुरक्षा सलाहकार सहित कई आला अधिकारी थे. सर्वदलीय बैठक मुंबई में चरमपंथी हमलों से उपजी परिस्थितियों पर विचार करने के लिए मनमोहन सिंह ने रविवार को दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है.
इस बैठक में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के भाग लेने की संभावना है. भाजपा नेता और संसद में नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँग की थी कि चरमपंथ पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए. संभावना है कि इस बैठक में चरमपंथ से निपटने के उपायों पर चर्चा होगी. विपक्षी दल चरमपंथ से निपटने के लिए पोटा जैसे सख़्त क़ानून की माँग करती रही है और सरकार का मत रहा है कि मौजूदा क़ानून ही इससे निपटने के लिए पर्याप्त हैं. संभावना है कि इस बैठक में यह मुद्दा एक बार फिर उठेगा. पिछले ही हफ़्ते प्रधानमंत्री ने राज्यों से चरमपंथ से निपटने के लिए विशेष टास्क फ़ोर्स बनाने की सलाह दी थी और देश की सुरक्षा और ख़ुफ़िया एजेंसियों को ज़्यादा चौकस होकर काम करने की सलाह दी थी. अमरीकी एजेंसी एफ़बीआई की तर्ज़ पर एक केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी बनाए जाने का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है. जानकार लोगों को मानना है कि इस बैठक में इस पर भी चर्चा हो सकती है. |
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