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असम: छह लोग पुलिस हिरासत में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमस में गुरुवार को हुए बम धमाकों के सिलसिले में पुलिस ने छह लोगों को हिरासत में लिया है. इनसे पूछताछ की जा रही है. इन धमाकों में अबतक 76 लोगों की मौत हो चुकी है. डेढ़ सौ से ज़्यादा लोग इन धमाकों में घायल हो गए हैं. धमाके के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था और इस बंद के कारण राज्य में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ. शनिवार को ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुवाहाटी का दौरा किया और अस्पताल जाकर घायलों से हाल-चाल भी पूछा. प्रधानमंत्री ने कहा कि इन कायरतापूर्ण कार्रवाई को अंजाम देने वालों के साथ कड़ाई के साथ निपटा जाएगा. उन्होंने कहा कि धमाकों की जाँच चल रही है और इसमें हरेक पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है. सुराग पुलिस का कहना है कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है उनसे हुई पूछताछ में विस्फोट के लिए उपयोग में लाए गए दो वाहनों का पता चला है.
इनमें एक कार है और दूसरी मोटरसाइकिल. अधिकारियों का कहना है कि इसके अलावा उस व्यक्ति को भी गिरफ़्तार किया गया है जो उस मोबाइल का मालिक है जिसके ज़रिए विस्फोटों की ज़िम्मेदारी स्वीकार करने वाला एसएमएस एक निजी टेलीविज़न चैनल को भेजा गया था. इस संदेश में एक कम ज्ञात संगठन 'इस्लामिक सेक्युरिटी फ़ोर्स इंडियन मुजाहिदीन' का नाम दिया गया था. हालांकि इसका नाम 'इंडियन मुजाहिदीन' से मिलता जुलता है, जिस पर पुलिस भारत के दूसरे हिस्सों में विस्फोट करने का आरोप लगाती रही है. हालांकि अभी जाँच आरंभिक दौर में है लेकिन विस्फोटों के लिए शक की पहली सुई असम में सक्रिय सबसे बड़े चरमपंथी गुट यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (अल्फ़ा) की ओर घूमी थी. लेकिन अल्फ़ा ने पहले ही विस्फोटों में अपना हाथ होने से इनकार कर दिया है. स्थानीय विशेषज्ञों का कहना है कि सिलसिलेवार ढंग से इतने कम समय में 13 विस्फोट करना अल्फ़ा की तकनीकी क्षमता के बाहर दिखाई देता है. |
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