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'आतंकवाद पर नरम नहीं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इन आरोपों से इनकार किया है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार आतंकवाद के मुद्दे पर नरम रुख़ अपना रही है. असम में हुए धमाकों के बाद गुवाहाटी दौरे पर गए प्रधानमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हम आतंकवाद पर नरम नहीं हैं. आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता ही नहीं हो सकता." गुरुवार को असम में हुए धमाकों में 76 लोग मारे गए थे. शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुवाहाटी का दौरा किया और अस्पताल जाकर घायलों से हाल-चाल भी पूछा. प्रधानमंत्री ने कहा कि इन कायरतापूर्ण कार्रवाई को अंजाम देने वालों के साथ कड़ाई के साथ निपटा जाएगा. उन्होंने कहा कि धमाकों की जाँच चल रही है और इसमें हरेक पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है. मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने यूपीए सरकार पर आरोप लगाया था कि वह आतंकवाद के मुद्दे पर नरम रुख़ अपना रही है. बंद का असर इस बीच असम में गुरुवार को हुए भीषण बम धमाके के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के 12 घंटे के बंद के कारण राज्य में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
गुवाहाटी में अखिल असम छात्र संघ (आसू) ने प्रधानमंत्री के दौरे का विरोध किया और उनके ख़िलाफ़ नारे लगाए. आयोजकों का कहना है कि शनिवार सुबह छह बजे से शुरू हुए बंद का मक़सद "असम की जनता की असुरक्षा की भावना" को अभिव्यक्ति देना है. पूरे राज्य में स्कूल, कॉलेज और बाज़ार पूरी तरह बंद रहे, राजधानी गुवाहाटी में सड़कों पर इक्का-दुक्का वाहन ही दिखाई दिए, शनिवार होने की वजह से सरकारी दफ़्तर पहले ही बंद थे. कांग्रेस पार्टी ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह आतंकवाद को राजनीति से जो़ड़ रही है, असम कांग्रेस के प्रमुख भुवनेश्वर कलिता ने कहा, "बंद से समस्या का समाधान नहीं निकल सकता, सभी पार्टियों को मिलजुल कर इस समस्या से निबटना चाहिए." हड़ताल सोमवार को भी असम में राज्यव्यापी बंद का आह्वान शक्तिशाली संगठन ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) ने किया.
आसू के वरिष्ठ नेता समुज्ज्वल भट्टाचार्य ने कहा, "यह हमारा राज्य है और हम अपने राज्य में अवैध आप्रवासियों और आतंकवादियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे." आसू का कहना है कि ये धमाका पड़ोसी बांग्लादेश से आए इस्लामी चरमपंथियों ने किया है, कई ख़ुफ़िया अधिकारियों पहले अलगाववादी संगठन (अल्फ़ा) की ओर इशारा किया था लेकिन किसी ने बांग्लादेशी चरमपंथी गुटों के शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया है. गुरुवार को असम में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया था. इन धमाकों में अबतक 76 लोगों की मौत हो चुकी है. डेढ़ सौ से ज़्यादा लोग इन धमाकों में घायल हो गए हैं. फ़ॉरेंसिक विशेषज्ञ मलबे से धमाकों के सूत्र की तलाश में जुटे हैं. पुलिस अधिकारी और गृह मंत्रालय फिलहाल कुछ भी साफ़ तौर पर कह पाने की स्थिति में नहीं हैं. |
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