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रविवार, 05 अक्तूबर, 2008 को 04:52 GMT तक के समाचार
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असम में हिंसा, 30 लोगों की मौत

हिंसा का शिकार व्यक्ति
उडालगुड़ी ज़िले में हिंसा के बाद सेना को फ़्लैग मार्च भी करना पड़ा
असम के तीन ज़िलों में स्थानीय बोडो आदिवासियों और बंगाली मुसलमानों के बीच हुए संघर्ष में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई है.

दो दिनों से जारी हिंसा में 50 से भी ज़्यादा लोगों के घायल होने की ख़बर है. इनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है.

राज्य के तीन ज़िलों में ताज़ा हिंसा की इन घटनाओं और व्याप्त तनाव को देखते हुए वहाँ सेना तैनात कर दी गई है. प्रभावित इलाकों में कर्फ़्यू लगा दिया गया है.

संघर्ष असम के उदालगुड़ी और दरांग ज़िलों में हुआ. ज़्यादा तनाव उदालगुड़ी ज़िले में है जहाँ शनिवार रात सेना ने फ़्लैग मार्च भी किया.

उधर राज्य के दरांज ज़िले में भी शनिवार को दंगा भड़कने के बाद रात का कर्फ़्यू लगाना पड़ा था. वहाँ स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है.

पुलिस को राज्य के हिंसा से प्रभावित तीन ज़िलों में सात जगहों पर उग्र भीड़ को रोकने के लिए गोलीबारी करनी पड़ी है.

बताया जा रहा है कि क़रीब 30 गाँव इन हिंसा की घटनाओं के कारण बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं.

क्यों भड़की हिंसा..?

दरअसल, तनाव की स्थिति तब पैदा हुई जब बोडो आदिवासियों ने आरोप लगाया कि मुसलमानों ने उनके मवेशी चुराए हैं. इसके बाद मुसलमानों के कुछ गाँवों पर हमला हुआ और कई घरों को आग लगा दी गई.

इसके बाद अगले दिन यानी शनिवार की सुबह एक मुसलमान व्यक्ति का शव उदालगुड़ी में कलेक्टर कार्यालय के सामने मिला.

घायल
दो दिनों की हिंसा के दौरान 50 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं

शव मिलने के बाद मुसलमानों में असंतोष व्याप्त हो गया और हिंसा फैल गई. घटना से नाराज़ मुसलमानों ने बोडो आदिवासियों के कई गाँवों पर हमला कर दिया.

पुलिस को रौता पुलिस थाने में दो जगहों और डेरागाँव पुलिस थाने में एक जगह गोलियाँ चलानी पड़ीं. इस दौरान तीन लोगों की मौत हो गई. रात तक रौता और सिमालगुड़ी गाँव से आठ और शव बरामद हुए.

इसके बाद दरांग ज़िले में हिंसा फैल गई, जहाँ बेसिमारी और बालाबाड़ी गाँवों में 30 घरों को आग लगा दी गई. सोनितपुर ज़िला भी हिंसा प्रभावित है.

स्थिति तनावपूर्ण

दो दिनों की हिंसा को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से तेज़ी से प्रयास किए जा रहे हैं पर हिंसा प्रभावित इलाकों की स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है.

प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से स्थानीय स्कूलों में राहत शिविर भी लगाए गए हैं. सरकारी हवाले से बताया गया है कि इन शिविरों में 20 हज़ार से भी ज़्यादा लोगों ने शरण ले रखी है.

राज्य के मुख्यमंत्री ने सभी समुदायों से अपील की है कि वे शांति और अमन की स्थिति बहाल करने में अपनी मदद दें.

वहीं तनावपूर्ण स्थिति को नियंत्रित न कर पाने की वजह से उदालगुड़ी के जिलाधिकारी का तबादला भी कर दिया गया है.

हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा करके लौटे पत्रकारों के मुताबिक अभी भी स्थिति चिंताजनक है और पुलिस की तैनाती कम होने की वजह से हिंसक घटनाएं पूरी तरह से रोकी नहीं जा सकी हैं.

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