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धमाके में चेक राजदूत सहित 53 की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शनिवार की रात पाकिस्तान के मैरियट होटल के बाहर हुए बम धमाके में चेक राजदूत सहित 54 लोग मारे गए हैं. पाकिस्तान में चेक गणराज्य के राजदूत इवो ज़दरैक की मृत्यु की पुष्टि प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने की है. इस धमाके में ढाई सौ लोग घायल हुए हैं. अब भी मलबे को हटाने और लाशों की तलाश का काम चल रहा है, कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है. अभी तक किसी ने इस धमाके की ज़िम्मेदारी नहीं ली है लेकिन पाकिस्तान की जाँच एजेंसियाँ इसे तालेबान का हमला मान रही हैं. होटल के सिक्यूरिटी वीडियो की तस्वीरें पत्रकारों को दिखाई गई हैं जिनमें साफ़ दिखता है कि विस्फोटक से लदा ट्रक जल रहा है और कुछ सुरक्षाकर्मी उसे बुझाने की कोशिश कर रहे हैं. इस हमले की निंदा दुनिया भर के कई देशों ने की है जिनमें अमरीका और ब्रिटेन प्रमुख हैं. मैरियट होटल को निशाना बनाकर किए गए इस हमले की भर्त्सना करते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा, "आतंकवाद एक किस्म का कैंसर है जिसे पाकिस्तान की सरकार ख़त्म कर देगी. पाकिस्तान के लोग मौत से नहीं डरते पर हम एक दिन आतंकवाद को पूरी तरह से ख़त्म करके ही दम लेंगे."
उन्होंने कहा, "हमला करने वालों का इस्लाम से कोई वास्ता नहीं है. पाकिस्तान हमारा है, हम उसे बचाएंगे." ज़रदारी ने अपने बयान में हमलों को कायरतापूर्ण करार देते हुए दुनियाभर की 'लोकतांत्रिक ताकतों' से अपील की है कि पाकिस्तान को बचाने में वे अपना सहयोग दें. सहयोग की पेशकश अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा है कि दोषियों को सज़ा दिलाने में उनका देश पाकिस्तान की मदद करने को तैयार है. व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि इस हमले से हमें उन ख़तरों के प्रति चेतावनी मिलती है, जिनका हम सामना कर रहे हैं. बयान में कहा गया है कि अमरीका इस संघर्ष में पाकिस्तान की चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार के साथ है. हालाँकि इस्लामाबाद धमाकों की ज़िम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है लेकिन बुश ने अल क़ायदा को पस्त करने के लिए एकजुट होने पर बल दिया. कड़ी आलोचना
ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने भी धमाके की आलोचना की है और कहा है कि ब्रिटेन पाकिस्तान के साथ मिलकर इस चुनौती का मुक़ाबला करेगा. पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मामलों के मंत्री रहमान मलिक का कहना है कि सरकार को आशंका थी कि ऐसा हमला हो सकता है. इस्लामाबाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "दो दिन पहले हमें जानकारी मिली थी कि संसद भवन पर हमले का ख़तरा है. इसलिए हमने पूरी सुरक्षा व्यवस्था की थी. सुबह से ही शहर में कड़ी सुरक्षा थी. लेकिन इसके बावजूद धमाका हो गया. हम इस मामले की जाँच कर रहे हैं." उन्होंने कड़े शब्दों में इस हमले की निंदा करते हुए कहा, "इस्लामाबाद में किए गए इस विस्फोट से पाकिस्तान की सरकार रुकने वाली नहीं है. चरमपंथ को ख़त्म करने का सरकार का अभियान चलता रहेगा. यह लड़ाई तबतक जारी रहेगी जबतक कि एक भी चरमपंथी पाकिस्तान में बचा है." उन्होंने कहा, "अगर पाकिस्तान सुरक्षित है, अफ़ग़ानिस्तान सुरक्षित है, तभी हम एक सुरक्षित विश्व की बात सोच सकते हैं." |
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