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शुक्रवार, 12 सितंबर, 2008 को 04:50 GMT तक के समाचार
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40 चरमपंथी मारे गए: पाक सेना
तालेबान
तालेबान के प्रवक्ता मौलवी उमर का दावा है कि कोई चरमपंथी मारा नहीं गया है
पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि देश के उत्तर पूर्व में अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से सटे क़बायली इलाके में सेना के साथ झड़पों में 40 इस्लामी चरमपंथी मारे गए हैं. दो सैनिक भी इन झड़पों में मारे गए हैं.

ये झड़पें अफ़ग़ानिस्तान के साथ सटी पाकिस्तान की सीमा पर स्वात और बजौर ज़िलों में हुई हैं.

उधर चरमपंथियों ने सेना के इस दावे का खंडन किया है और कहा है कि कोई तालेबान लड़ाका नहीं मारा गया है.

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर मुराद ख़ान ने बीबीसी को गुरुवार रात बताया, "जो चरमपंथी मारे गए है उनमें विदेशी चरमपंथी भी शामिल हैं. बजौर क़बायली एजेंसी के टैंक खाटा इलाक़े में झड़पों में 12 चरमपंथी मारे गए."

 जो चरमपंथी मारे गए है उनमें विदेशी चरमपंथी भी शामिल हैं. बजौर क़बायली एजेंसी के टैंक खाटा इलाक़े में झड़पों में 12 चरमपंथी मारे गए
मेजर मुराद शाह

ये झड़पें तब शुरु हुईं जब सेना ने चरमपंथियों के एक ठिकाने के बारे में ख़ुफ़िया जानकारी मिलने के बाद छापा मारा. सेना को जानकारी मिली थी कि अफ़ग़ान तालेबान कमांडर क़ारी ज़िया-उर रहमान और कुछ अन्य विदेशी चरमपंथी उस जगह पर छिपे हुए हैं.

उन्होंने दो सैनिकों के इस मुठभेड़ में मारे जाने की पुष्टि की है.

उधर स्वात में हेलिकॉप्टर गनशिप्स का इस्तेमाल करते हुए सेना ने क़बाल इलाक़े में एक स्थानीय कमांडर ख़ुर्शीद ख़ान के घर पर बमबारी की और छह चरमपंथी मारे गए.

स्वात के ही मट्टा इलाक़े में दो और चरमपंथी मारे गए.

'कोई तालेबान लड़ाका नहीं मरा'

तालेबान प्रवक्ता मौलवी उमर ने बीबीसी उर्दू सेवा के साथ बातचीत में कहा, "गुरुवार को हुई लड़ाई में कोई भी तालेबान लड़ाका नहीं मारा गया है. सेना की गोलीबारी से बजौर के आम नागरिकों को नुकसान ज़रूर पहुँचा है."

 गुरुवार को हुई लड़ाई में कोई भी तालेबान लड़ाका नहीं मारा गया है. सेना की गोलीबारी से बजौर के आम नागरिकों को नुकसान ज़रूर पहुँचा है
तालेबान प्रवक्ता

कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बीबीसी को बताया कि लड़ाकू विमानों की गोलीबारी में 200 दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं.

अगस्त की शुरुआत से ही सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच झड़पें जारी हैं और लगभग ढ़ाई लाख लोग इस लड़ाई से बचने के लिए उस जगह से पलायन कर चुके हैं.

माना जाता है कि बजौर अल क़ायदा के लड़ाकों का बड़ा अड्डा है और ये क्षेत्र संदिग्ध अमरीकी मिसाइलों का निशाना भी बनता रहा है.

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