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'कश्मीरी लोगों के संघर्ष के प्रति वचनबद्ध' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति बनने के बाद संसद को अपने पहले संबोधन में आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि पाकिस्तान को अपनी ज़मीन का इस्तेमाल दूसरे देशों पर आतंकवादी हमलों के लिए नहीं होने देना चाहिए. कश्मीर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "मूल अधिकारों की बहाली को लेकर कश्मीरी लोगों के न्यायसंगत संघर्ष के प्रति हम वचनबद्ध हैं." संबोधन में उन्होंने भारत-पाक संबंधों का मुद्दा भी उठाया. ज़रदारी का कहना था कि पाकिस्तान ने भारत के साथ समग्र बातचीत का सिलसिला फिर शुरु करने का फ़ैसला किया है. आसिफ़ अली ज़रदारी का कहना था, "लोकतंत्र सरकार को बाध्य करता है कि वो पाकिस्तान के लोगों को न्याय और शांति दे और भारत के साथ शांति स्थापित करे." उन्होंने आतंकवाद और कट्टरपंद को जड़ से मिटा देने का वादा किया. पर साथ ही ज़रदारी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के नाम पर किसी को पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करने दिया जाएगा. पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर अमरीकी सेना के हमलों को लेकर अमरीका और पाकिस्तान के बीच तनाव चल रहा है. आसिफ़ अली ज़रदारी इसी महीने राष्ट्रपति चुनाव जीतकर इस पद के लिए चुने गए हैं. ज़रदारी पिछले वर्ष दिसंबर में अपनी पत्नी बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद राजनीति में आए थे. लगभग 11 साल जेल में रहे आसिफ़ अली ज़रदारी अब पाकिस्तान की राजनीति के सबसे शीर्ष पद पर पहुँच गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें शांति प्रक्रिया रुकी नहीं है : पाकिस्तान18 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस ज़रदारी ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली09 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस चुनौतियाँ भरा राजनीतिक सफ़र06 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस गठबंधन ही नहीं भरोसा भी टूटा 25 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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