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मंगलवार, 02 सितंबर, 2008 को 03:40 GMT तक के समाचार
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अब युद्धस्तर पर बचाव और राहत कार्य

सुरक्षित स्थान की तलाश में जाते लोग
नए-नए इलाक़ों में पानी घुसने से परेशानी बढ़ती जा रही है

बिहार की कोसी नदी में आई भीषण बाढ़ के 15 दिनों बाद राज्य और केंद्र सरकार युद्ध स्तर पर बचाव और राहत कार्य में जुट गईं दिखती हैं.

मंगलवार को सेना की 16 और टुकड़ियाँ वहाँ पहुँच रही हैं और इसके साथ ही वहाँ प्रशासन की मदद कर रही सेना की टुकड़ियों की संख्या 40 हो जाएगी.

कुल नौ हेलिकॉप्टर राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं और नावों की संख्या हर दिन बढ़ रही है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि अगले तीन दिनों में बाढ़ में फँसे हुए सभी लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुँचा दिया जाएगा.

राज्य प्रशासन के अनुसार अब तक पाँच लाख लोगों को बाढ़ग्रस्त इलाक़ों से निकाला गया है लेकिन अभी भी लाखों लोग वहाँ फँसे हुए हैं.

18 अगस्त को कोसी नदी के तटबंध टूटने से आए बाढ़ के कारण अब तक 80 लोगों की जानें जा चुकी हैं, हालांकि लोगों का कहना है कि मरने वालों की संख्या बहुत अधिक हो सकती है.

सहायता

पिछले हफ़्ते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोनिया गाँधी के साथ बाढ़ग्रस्त इलाक़ॉं का दौरा करने के बाद इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया था.

इसके बाद से वहाँ बाढ़ की स्थिति और भी बिगड़ती रही और हर दिन पानी नए-नए इलाक़ों में प्रवेश करता रहा.

सेना का हेलिकॉप्टर
सेना के छह हेलिकॉप्टर काम पर लगे हुए हैं

इसके चलते बिहार के 16 ज़िले बाढ़ की चपेट में हैं जिनमें से कोसी इलाक़े के चार ज़िलों सहरसा, अररिया, सुपौल और मधेपुरा में बाढ़ की स्थिति बहुत गंभीर है.

प्रशासन के आँकड़ों के अनुसार कोई 33 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं जिनमें से 22 लाख लोग तो कोसी इलाक़े के ही हैं.

रविवार को सेना की 21 टुकड़ियाँ बिहार भेजी गई थीं और इसके बाद मंगलवार को 16 और टुकड़ियाँ वहाँ पहुँच रही हैं. ये सहायता पहले से वहाँ काम कर रही टुकड़ियों के अतिरिक्त है.

इसके अलावा सेना ने छह हेलिकॉप्टर और लगाए हैं इसके साथ ही वहाँ राहत और बचाव कार्य में लगे हेलिकॉप्टरों की संख्या अब नौ हो गई है.

प्रशासन का कहना है कि सुपौल ज़िले के छापातुर, त्रिवेणीगंज, प्रतापगंज और वीरपुर में, मधेपुरा ज़िले के कुमारखंड, चौसा, आलमनगर और ग्वालपाड़ा, सहरसा के सौर बाज़ार और सोनवर्षा और अररिया ज़िले के कई स्थानों पर अभी भी भारी संख्या में लोग फँसे हुए हैं.

अब राहत और बचाव कार्य के केंद्र में ये इलाक़े रहेंगे जिससे कि वहाँ फँसे हुए लोगों को जितनी जल्दी हो सके वहाँ से निकाला जा सके.

जिन लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है उन सभी लोगों को शरण देना और राहत सामग्री उपलब्ध कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है.

क़रीब 12 लाख लोग बेघर हो गए हैं. राहत शिविरों में रहने की जगह नहीं और अपर्याप्त राहत सामग्री को लेकर कई इलाक़ों में तनाव भी है.

समन्वय की चुनौती

केंद्र सरकार ने सवा लाख टन अनाज बाढ़ पीड़ितों को देने की घोषणा पहले ही कर दी थी.

पीने का पानी
राहत सामग्री को ज़रुरतमंदों तक पहुँचाना के काम का समन्वय भी चुनौती बना हुए है

अब केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभिन्न राज्य सरकारों से सहायता बिहार पहुँचने लगी है.

रेलवे मंत्रालय ने 70 करोड़ रुपयों की सहायता देने की घोषणा पहले ही कर रखी है वहीं पेट्रोलियम मंत्रालय ने 10 हज़ार टन कैरोसिन (मिट्टी का तेल) और अतिरिक्त एलपीजी भेजने की घोषणा की है.

इसके अलावा तेल कंपनियों ने पाँच करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की है.

उधर सीआरपीएफ़ के जवानों ने अपने एक दिन का वेतन बाढ़ पीड़ितों को देने की घोषणा की है जिससे तीन करोड़ रुपए एकत्रित होंगे.

इस बीच रामविलास पासवान के इस्पात मंत्रालय ने बाढ़ग्रस्त इलाक़ों में मंत्रालय की ओर से 150 राहत शिविर खोलने की घोषणा की है.

वहाँ 21 मेडिकल टीमें काम कर रही हैं और सेना ने पीने के पानी के 14 केंद्र स्थापित किए हैं.

राहत सामग्री बड़ी मात्रा में पहुँच रही है लेकिन मुश्किल ये है कि इनका वितरण कैसे किया जाए. कई स्वयंसेवी संगठन और ग़ैर सरकारी संगठन भी इलाक़ों में कैंप कर रहे हैं.

लेकिन इन सभी संगठनों के लिए राहत और बचाव कार्य में सरकारी विभाग के साथ समन्वय स्थापित करना ही बड़ी चुनौती बन गया है.

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि पीने के पानी की कमी और ख़राब परिस्थितियों के कारण महामारी फैल सकती है. बाढ़ प्रभावित सहरसा ज़िले के एक कैंप में डायरिया और बुख़ार के 35 से ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं.

रेलवे स्टेशन बने शिविर

इस बीच बाढ़ ग्रस्त इलाक़ों के रेलवे स्टेशनों को एक तरह से बाढ़ राहत शिविरों में तब्दील कर दिया गया है.

 17 जोड़ी बाढ़ राहत ट्रेनें चलाई जा रही हैं जिससे बाढ़ पीड़ित जहाँ जाना चाहें बिना शुल्क दिए जा सकते हैं

इन रेलवे स्टेशनों पर हज़ारों लोगों ने शरण ले रखी है और वहाँ उन्हें दो वक्त का खाना और नाश्ता आदि दिया जा रहा है.

इन स्टेशनों से 17 जोड़ी बाढ़ राहत ट्रेनें चलाई जा रही हैं जिससे बाढ़ पीड़ित जहाँ जाना चाहें बिना शुल्क दिए जा सकते हैं.

इससे पहले रेलमंत्री लालूप्रसाद यादव ने एक लाख बोतल रेलनीर पानी की बोतलें और 25 टैंक पीने का पानी भेजने की घोषणा की थी.

रामविलास पासवान ने इस्पात मंत्रालय की ओर से 150 बाढ़ राहत शिविर खोलने की घोषणा की है.

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