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भारी बारिश से राहत कार्य बाधित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार में कोसी नदी के तटबंध टूटने के बाद भारी बारिश और टूटी फूटी सड़कों के कारण प्रशासन को बाढ़ पीड़ितों तक मदद पहुंचाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. अभी तक इस बाढ़ से 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और कम से 20 लाख से अधिक लोग प्रभावित बताए जाते हैं. बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग मंत्री नीतीश मिश्रा के अनुसार भारी बारिश के कारण राहत एवं बचाव कार्य बाधित हो रहा है. नेपाल में कोसी नदी पर बना तटबंध टूटने के साथ ही कोसी नदी ने बिहार में पिछले एक हफ्ते से भारी तबाही मचा इस बीच खबर मिली है कि पूर्णिया ज़िले में शनिवार रात को कोसी नदी ने जानकीनगर ब्रांच केनाल तटबंध तोड़ दिया है जिससे वहाँ पहले ही बाढ़ में फंसे लाखों लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. हालांकि इस खबर की स्वतंत्र रुप से पुष्टि नहीं हो सकी है. अपुष्ट सूत्रों के अनुसार इससे बाढ़ का पानी धारहरा कोठी, धामदहा और भवानीपुर ब्लॉक के गाँवों में भी घुस गया है. जबकि मधेपुरा कस्बे में पानी छह फ़ुट ऊपर बह रहा है इसका कारण नेपाल का कोसी में करीब 2.5 लाख क्यूसेक पानी का छोड़ा जाना बताया जा रहा है. रेलें भी बंद राज्य के मधेपुरा, अररिया और सुपौल ज़िले कोसी की बाढ़ से सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं. बीबीसी की टीम जब इन इलाक़ों में पहुंची तो लोगों ने अपनी विपदा सुनाई और कहा कि उन तक राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही है. बाढ़ का पानी बनमंखी-बिहारीगंज रेलवेलाइन के भी ऊपर बह रहा है. जो मधेपुरा ज़िले के बिहारीगंज ब्लॉक के लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने के लिए जीवनदायी साबित हो रही थी. लेकिन अब इस रूट पर रेलों का चलना बंद हो गया है.
सरकार का कहना है कि बाढ़ पीड़ित कोसी अंचल में वायु सेना के चार हेलीकॉप्टरों, 840 नौकाओं और सैनिकों की तीन टुकड़ियों की मदद से राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है. बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री नितीश मिश्रा ने रायटर समाचार एजेंसी से कहा, "वर्षा हमारे राहत और बचाव प्रयासों को बेकार कर रही है और इसकी वजह से हमारे हेलीकॉप्टर भी ज़्यादातर समय काम नहीं कर पा रहे हैं." लेकिन बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के मुताबिक लाखों की तादाद में लोग अब भी बाढ़ में फंसे हुए है और राहत शिविरों को भी बहुत कम सरकारी सहायता मिल पा रही है. राज्य सरकार का कहना है कि उसे प्राप्त आधिकारिक सूचना के अनुसार बाढ़ की वजह से कोसी क्षेत्र में 28 और पूरे राज्य में 76 लोग मारे गए हैं लेकिन दूसरी तरफ बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोग दावा करते हैं कि मृतकों की तादाद हजारों में हो सकती है. राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग की ताज़ा जानकारी के अनुसार कोसी नदी की बाढ़ से 755 गाँवो के 22 लाख 75 हजार लोग प्रभावित हुए हैं. बिगड़ी हालत आपदा प्रबंधन विभाग के अपर आयुक्त पी अमृत ने बीबीसी को बताया कि अब तक कोसी क्षेत्र से साढ़े तीन लाख बाढ़ पीड़ितो को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है. उन्होंने कहा कि अभी भी लगभग दो लाख लोगों के फँसे होने का अनुमान है. कोसी नदी में टूटे हुए तटबंध के रास्ते पर बनी मुख्यधारा में शनिवार को 1,83000 क्यूसेक पानी बह रहा है. वर्षा होते रहने के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने से राज्य के कुछ और नए इलाको में बाढ़ का पानी फैल गया है और इस कारण स्थिति पहले से ज़्यादा गंभीर हुई है. इस बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित ज़िले हैं-सुपौल, सहरसा, अररिया और मधेपुरा. पिछले शुक्रवार को बाढ़पीड़ितों को लेकर जा रही सेना की एक नौका नदी में पलट गई जिससे कम 20 लोग बह गए और दस के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली है. |
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