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कोसी का क़हर जारी, सेना मदद में जुटी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के मधेपुरा, अररिया, सुपौल और सहरसा ज़िलों में कोसी नदी की बाढ़ का क़हर जारी है. राहत और बचाव कार्य के लिए सेना को बुला लिया गया है. कोसी नदी के तटबंध टूटने से इस बाढ़ से कोई 25 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. वैसे इस बाढ़ से कुल 15 ज़िले प्रभावित हुए हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाढ़ पीड़ितों के लिए केंद्र सरकार से एक लाख टन अनाज और एक हज़ार करोड़ रुपयों की सहायता की माँग की है. संभावना है कि नीतीश कुमार बुधवार को दिल्ली आकर प्रधानमंत्री से मिलेंगे और उन्हें बाढ़ से हुए नुक़सान और राज्य सरकार के प्रयासों की जानकारी देंगे. मुख्यमंत्री केंद्रीय सहायता की माँगें प्रधानमंत्री के समक्ष भी रखेंगे. ख़बर यह भी है कि प्रधानमंत्री आने वाले दिनों में बाढ़ प्रभावित इलाक़ों का दौरा कर सकते हैं. उधर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने मंगलवार की देर रात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को फ़ोन कर बाढ़ के बारे में जानकारी ली है. मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार और राष्ट्रपति ने प्रभावित लोगों के साथ सहानुभूति जताते हुए राहत कार्य और तेज़ करने का आश्वासन दिया है. राहत एवं बचाव कार्य भारतीय वायु सेना के तीन हेलीकॉप्टर भी राहत सामग्री बांटने के काम मे लगे हुए हैं. आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त आयुक्त प्रत्याय अमित ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि नेपाल के एक गांव के पास भी कोसी का तटबंध टूट गया है जिससे अब और पानी आ रहा है और कई अन्य इलाक़ों में भी पानी भर गया है.
उन्होंने बताया कि बुधवार से मधेपुरा में सेना के करीब 100 जवान राहत कार्यों में लग जाएंगे. इसके अलावा सशस्त्र सीमा बल , स्पेशल फोर्स और राष्ट्रीय आपदा रेस्पांस फोर्स के जवान भी मदद कर रहे हैं. सेना के अलावा अर्धसैनिक बलों और स्थानीय पुलिस बलों ने भी राहत कार्य की कमान संभाल रखी है. सेना के हैलिकॉप्टर पिछले सात दिनों से लगातार खाद्य सामग्री के पैकेट बाढ़ पीड़ितों तक पहुँचा रहे हैं. अधिकारियों ने कहा है कि हालात ख़राब हैं और बड़े पैमाने पर बचाव और राहत कार्य चलाए गए हैं. बचाव कार्य के लिए 200 कश्तियाँ और 25 मोटर वाली नावें इस्मेताल की जा रही है. प्रभावित इलाक़ों तक खाने के पैकेट पहुँचाने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ली गई है. अधिकारियों ने बताया कि 50 से ज़्यादा शिविर लगाए गए हैं. बाढ़ से बचने के लिए लोगों ने हाइवे और ऊँची इमारतों में शरण ली है. स्थिति भयावह कोसी के तटबंध टूटने नेपाल से सटे अररिया, सुपौल और मधेपुरा ज़िलों में सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचा है. सरकारी अधिकारियों के मुताबिक़ कोई 25 लाख लोग बेघर हो गए हैं. अब तक मिली जानकारी के अनुसार 40 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन जानमाल की क्षति का सही आकलन बाढ़ के उफान के थमने के बाद ही हो सकेगा.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने स्थिति को भयावह बताया है. मंगलवार सुबह बिहार के दो जेलों में से 100 क़ैदियों को दूसरे सुरक्षित जेलों में ले जाया गया. रिपोर्टों के मुताबिक बाढ़ के कारण हज़ारों हेक्टेयर भूमि पर खड़ी फसलों को नुकसान पहुँचा है. बिहार सरकार ने राहत एजेंसियों से अपील की है कि वे बाढ़ प्रभावित इलाक़ों तक राहत पहुँचाने में मदद करें. हालांकि बहुत से लोगों का कहना है कि अब तक उन्हें कोई मदद नहीं मिली है. बाढ़ से प्रभावित जुगत लाल ने रॉयटर्स को बताया, " किसी तरह का कोई इंतज़ाम नहीं किया गया है. हम नदी के पास ही रहते हैं, जब प्यास लगती है तो इसी का पानी पीते हैं हालांकि इसी नदी के कारण लोगों की मौत भी होती है." इस बीच पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में जून के बाद से भारी बारिश और बाढ़ के चलते 700 लोग मारे जा चुके हैं. अधिकारियों के मुताबिक ज़्यादातर मौतें घर ढहने से हुई हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें बिहार, उत्तर प्रदेश में बाढ़ से डेढ़ सौ मौतें22 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस उत्तर भारत में बाढ़ की स्थिति गंभीर21 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस भाखड़ा बांध में जलस्तर बढ़ा19 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस साथी नहीं मुसीबत बने हाथी02 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस बाढ़ और भूस्खलन में 23 लोगों की मौत16 जून, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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