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शुक्रवार, 22 अगस्त, 2008 को 04:29 GMT तक के समाचार
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बिहार, उत्तर प्रदेश में बाढ़ से डेढ़ सौ मौतें
बाढ़ (फाइल फोटो)
उत्तर भारत के कई राज्य बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित हैं
बिहार और उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. कोसी का पूर्वी तटबंध टूटने से बिहार के सुपौल ज़िले में एक लाख लोग फँस गए हैं.

बीबीसी के बिहार संवाददाता मणिकांत ठाकुर ने बताया है कि लगभग पाँच दिन पहले भीमनगर बराज से 12 किलोमीटर दूर कुसहा के नज़दीक नेपाल के इलाक़े में कोसी नदी का पूर्वी तटबंध लगभग पांच सौ मीटर के दायरे में ध्वस्त हो गया.

तटबंध टूटने से नेपाल से सटे सुपौल ज़िले के कई प्रखंडों में अचानक पानी फैल गया और लगभग पाँच लाख लोग अचानक आई बाढ़ में फँसे हुए हैं.

सुपौल के अलावा कोसी नदी के किनारे स्थित अररिया ज़िले में भी भारी तबाही हुई है.

राज्य सरकार का कहना है कि नेपाल के इलाक़े में स्थित तटबंध को मज़बूत करने के लिए इंजीनियर भेजे गए थे लेकिन स्थानीय लोगों ने उन्हें सहोयग नहीं दिया.

लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी नाकामी छिपाने के लिए ये बयान दे रहे हैं.

दरअसल बाढ़ से पहले ही तटबंध का जायजा लेने के लिए टीम भेजी गई थी जिसने कहा था कि तटबंध टूटने का ख़तरा नहीं है.

गुस्सा फूटा

समय पर राहत नहीं पहुँचने के कारण प्रभावित लोगों में भारी रोष है. सहानुभूति जताने पहुँचे एक विधायक पर लोग टूट पड़े और उनका एक हाथ टूट गया.

समय पर राहत नहीं पहुँचने से लोगों में गुस्सा है

इसी तरह पटना से विशेष प्रतिनिधि के तौर पर पहुँचे दो अधिकारियों को भी लोगों ने खदेड़ दिया और पुलिस वालों पर भी लोगों का गुस्सा फूटा.

गुरुवार को सेना के हेलीकॉप्टर की मदद से खाने की सामग्री पहुँचाने की कोशिश की गई लेकिन सिर्फ़ दो सौ पैकेट गिराए गए.

आम जनता में गुस्से को देखते हुए सरकार के प्रवक्ता पिछले दो दिनों से कह रहे थे कि अब राहत और बचाव कार्य में सेना की मदद ली जाएगी.

लेकिन राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव आरके सिंह ने बीबीसी को बताया कि सेना के किसी जवान को राहत कार्य में नहीं लगाया गया है.

आपदा विभाग का कहना है कि राज्य में बाढ़ से अब तक 40 लोगों की जानें गई हैं और 11 ज़िले के 900 गाँव इसकी चपेट में हैं.

उत्तर प्रदेश

बीबीसी के उत्तर प्रदेश संवाददाता, रामदत्त त्रिपाठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ ही दिनों के दौरान बाढ़ और बारिश से मरनेवालों की तादाद बढ़कर 114 हो गई है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष जून में मानसून आने के बाद से राज्य में क़रीब 660 लोग बारिश और बाढ़ के कारण मर चुके हैं.

इनमें से 27 लोग बारिश और उसके कारण बाढ़ की ताज़ा स्थितियों के चलते मारे गए हैं.

राज्य के राहत आयुक्त जीके टंडन ने बताया कि राजधानी लखनऊ और पवित्र नगरी बनारस के कई हिस्सों में बारिश के कारण जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है.

इसी तरह पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्य असम में भी भारी बारिश के कारण गंभीर संकट पैदा हो गया है.

उत्तर प्रदेश में गंगा सहित कई प्रमुख नदियाँ कई जगहों पर ख़तरे के निशान से काफ़ी ऊपर बह रही हैं.

जीके टंडन ने बताया कि राज्य के 21 ज़िलों के तीन हज़ार से भी ज़्यादा गाँव बारिश और बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं.

प्रभावित इलाक़ों से क़रीब 50 हज़ार लोगों को इस गंभीर स्थिति से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है.

राज्य सरकार ने बाढ़ और बारिश से प्रभावित क़रीब 15 लाख लोगों के लिए 268 राहत शिविरों की व्यवस्था की है.

राज्य में सड़क और रेल यातायात भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और कई रेलगाड़ियाँ काफी विलंब से चल रही हैं.

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