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मंगलवार, 26 अगस्त, 2008 को 11:39 GMT तक के समाचार
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कोसी का क़हर, राहत कार्य के लिए सेना
बाढ़
बिहार में बाढ़ की स्थिति खराब बनी हुई है
बिहार में कोसी नदी के तटबंध टूटने से हो रही भीषण तबाही में राहत कार्यां के लिए सेना को बुलाया गया है.

भारतीय वायु सेना के तीन हेलीकॉप्टर भी राहत सामग्री बांटने के काम मे लगे हुए हैं.

आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त आयुक्त प्रत्याय अमित ने समाचार एजेंसी प्रेट्र को बताया कि नेपाल के एक गांव के पास भी कोसी का तटबंध टूट गया है जिससे अब और पानी आ रहा है और कई अन्य इलाक़ों में भी पानी भर गया है.

उन्होंने बताया कि बुधवार से मधेपुरा में सेना के करीब 100 जवान राहत कार्यों में लग जाएंगे. इसके अलावा सशस्त्र सीमा बल , स्पेशल फोर्स और राष्ट्रीय आपदा रेस्पांस फोर्स के जवान भी मदद कर रहे हैं.

बाढ़ से स्थिति भयावह

कोसी के तटबंध टूटने नेपाल से सटे अररिया, सुपौल और मधेपुरा ज़िलों में सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचा है.

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक़ 20 से 25 लाख लोग बेघर हो गए हैं.

अब तक मिली जानकारी के अनुसार 40 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन जानमाल की क्षति का सही आकलन बाढ़ के उफान के थमने के बाद ही हो सकेगा.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने स्थिति को भयावह बताया है.

अधिकारियों ने कहा है कि हालात ख़राब हैं और बड़े पैमाने पर बचाव और राहत कार्य चलाए गए हैं.

बचाव कार्य के लिए 200 कश्तियाँ और 25 मोटर वाली नावें इस्मेताल की जा रही है. प्रभावित इलाक़ों तक खाने के पैकेट पहुँचाने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ली गई है.

अधिकारियों ने बताया कि 50 से ज़्यादा शिविर लगाए गए हैं.

बाढ़ से बचने के लिए लोगों ने हाइवे और ऊँची इमारतों में शरण ली है.

राहत कार्य

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक एक बाढ़ प्रभावित व्यक्ति संजीव कुमार ने बताया, "करीब 700-800 घरों को नुकसान पहुँचा है. लोग किसी तरह लकड़ियों और घरों की छतों पर टिके हुए हैं. जिन घरों की छतों को नुकसान पहुँचा है उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि क्या करें."

कोसी नदी का पानी लगातार बढ़ता जा रहा है

मंगलवार सुबह बिहार के दो जेलों में से 100 क़ैदियों को दूसरे सुरक्षित जेलों में ले जाया गया.

रिपोर्टों के मुताबिक बाढ़ के कारण हज़ारों हेक्टेयर भूमि पर खड़ी फसलों को नुकसान पहुँचा है.

बिहार सरकार ने राहत एजेंसियों से अपील की है कि वे बाढ़ प्रभावित इलाक़ों तक राहत पहुँचाने में मदद करें. हालांकि बहुत से लोगों का कहना है कि अब तक उन्हें कोई मदद नहीं मिली है.

बाढ़ से प्रभावित जुगत लाल ने रॉयटर्स को बताया, " किसी तरह का कोई इंतज़ाम नहीं किया गया है. हम नदी के पास ही रहते हैं, जब प्यास लगती है तो इसी का पानी पीते हैं हालांकि इसी नदी के कारण लोगों की मौत भी होती है."

इस बीच पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में जून के बाद से भारी बारिश और बाढ़ के चलते 700 लोग मारे जा चुके हैं. अधिकारियों के मुताबिक ज़्यादातर मौतें घर ढहने से हुई हैं.

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