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राष्ट्रीय आपदा है बिहार की बाढ़: प्रधानमंत्री | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बिहार में आई बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा कहा है. उन्होंने राहत और बचाव कार्य के लिए तत्काल 1000 करोड़ रुपए की सहायता देने की घोषणा की है. प्रधानमंत्री ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 1.25 लाख टन खाद्यान्न देने की भी घोषणा की है. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ बाढ़ प्रभावित इलाक़ों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद प्रधानमंत्री ने राज्य को हरसंभव सहायता देने का आश्वसान दिया.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भारतीय वायु सेना के एक विशेष विमान से पुर्णिया पहुँचे. वहाँ से उन्होंने वायु सेना के एक विशेष हेलिकॉप्टर से बाढ़ प्रभावित सुपौल, सहरसा, अररिया और मधेपुरा ज़िलों का हवाई सर्वेक्षण किया. उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, लालू प्रसाद यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद थे. बाढ़ प्रभावित इलाक़ों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "बिहार की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है. बहुत गंभीर स्थिति है. मैं आज दौरा करके आया हूँ. फिलहाल राहत के लिए 1000 करोड़ की राशि केंद्र सरकार ने स्वीकृत कर दी है. और अधिक पैसे की ज़रूरत पड़ी तो और देंगे." मनमोहन सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने एक लाख टन अनाज की मांग की थी ताकि प्रभावित लोगों की मदद की जा सके. केंद्र ने राहत के लिए एक लाख, 25 हज़ार टन अनाज देने की घोषणा की है. बिहार में आई बाढ़ में अभी तक 55 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 15 ज़िलों के 25 लाख लोग इससे प्रभावित हुए हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की थी और राज्य के लिए पैकेज की मांग की थी. मदद लोग बता रहे हैं कि इन इलाक़ों में यह उनकी याद में सबसे बड़ी बाढ़ है.
राज्य सरकार ने पहले ही सेना को मदद के लिए बुलवा लिया का. इस समय तीन हेलिकॉप्टर और कोई चार सौ नावों से बचाव कार्य किया जा रहा है. इस बीच मधेपुरा शहर में भी पानी भर आया है. प्रशासन ने लोगों को शहर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की चेतावनी दी थी लेकिन हज़ारों लोग अभी भी वहाँ फँसे हुए हैं. अभी तक एक लाख 20 हज़ार लोगों को बाढ़ग्रस्त इलाक़ों से निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया है. लोगों ने बीबीसी की टीम से कहा कि प्रशासन ने शहर छोड़ने की चेतावनी तो दे दी लेकिन यह नहीं बताया कि वे किस तरह शहर छोड़ दें और शहर छोड़कर कहाँ चले जाएँ.
बाढ़ के कारण जानबचाकर निकल आए कुछ लोगों ने मधेपुरा रेलवे स्टेशन में शरण ले रखी है. इन लोगों ने आरोप लगाए हैं कि कुछ लोग नावों से जान बचाने के बदले महिलाओं के गहने छीन रहे हैं और उनसे अभद्र व्यवहार कर रहे हैं. जगह-जगह लोगों ने मकानों की ऊपरी मंज़िल में शरण ले रखी है और हज़ारों परिवार अपने मकानों की छतों पर बैठे मदद का इंतज़ार कर रहे हैं. गत 18 अगस्त को नेपाल सीमा के पास कोसी नदी का तटबंध टूटने के कारण यह बाढ़ आई है. अधिकारियों का कहना है कि कोसी नदी ने अपना रास्ता बदल दिया है और अब वह उस मार्ग से बह रही है जहाँ दो सौ साल पहले बहा करती थी. इसी के कारण बाढ़ उन इलाक़ों में पहुँच गई है जहाँ पिछले कई सालों में बाढ़ नहीं आई. | इससे जुड़ी ख़बरें कोसी का क़हर जारी, सेना मदद में जुटी27 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस कोसी का क़हर, राहत कार्य के लिए सेना26 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस बिहार में बाढ़ से भारी तबाही25 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस बिहार, उत्तर प्रदेश में बाढ़ से डेढ़ सौ मौतें22 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस उत्तर भारत में बाढ़ की स्थिति गंभीर21 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस भाखड़ा बांध में जलस्तर बढ़ा19 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस पंजाब में बाढ़ से भारी तबाही 18 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस बाढ़ में बस बही, 40 के मरने की आशंका10 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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