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कोसी का जलस्तर बढ़ा, हालात बिगड़े | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार सरकार का कहना है कि बाढ़ पीड़ित कोसी अंचल में वायु सेना के चार हेलीकॉप्टरों, 840 नौकाओं और सैनिकों की तीन टुकड़ियों की मदद से युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है. लेकिन बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में घूमते हुए स्थानीय लोगों से जो शिकायतें सुनने को मिल रही हैं उनके मुताबिक लाखों की तादाद में लोग अभी भी इस प्रलयकारी बाढ़ के बीच फंसे हुए है और राहत शिविरों में भी बहुत ही कम सरकारी सहायता मिल पा रही है. राज्य सरकार कहती है कि आज की तारीख तक उसे प्राप्त अधिकारिक सूचना के अनुसार बाढ़ की वजह से कोसी क्षेत्र में 28 और पूरे राज्य में 76 लोग मारे गए हैं लेकिन दूसरी तरफ बाढ़ प्रभावित जिस इलाके में भी जाइए, वहाँ लोग अनेक बहती हुई लाशें देखने का दावा करते हुए बताते हैं कि मृतकों की तादाद सैकड़ो में नहीं, हजारों में हो सकती है. राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग की ताज़ा जानकारी के अनुसार कोसी नदी की बाढ़ से 755 गाँवो के 22 लाख 75 हजार लोग प्रभावित हुए हैं. आपदा प्रबंधन विभाग के अपर आयुक्त पी अमृत ने बीबीसी को बताया की अब तक कोसी क्षेत्र से साढ़े तीन लाख बाढ़ पीड़ितो को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है. उन्होंने कहा कि अभी भी लगभग दो लाख लोगों के फँसे होने का अनुमान है. बिगड़ी हालत बिहार के जल संसाधन मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि अगले साल मार्च से पहले इस क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत कर पाना संभव नही होगा. उनके मुताबिक मरम्मत का काम विशेषज्ञो की देखरेख में शुरु किया जा रहा है और इसमें नेपाल की सरकार ने भी हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है.
कोसी नदी में टूटे हुए तटबंध के रास्ते बनी मुख्य धारा में शनिवार को 1,83000 क्यूसेक पानी का बहाव हो रहा है यानी वर्षा होते रहने के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने से राज्य के कुछ और नए इलाको में बाढ़ का पानी फैल गया है और इस कारण स्थिति पहले से ज़्यादा गंभीर हुई है. इस बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित ज़िले हैं-सुपौल, सहरसा, अररिया और मधेपुरा. राज्य सरकार का कहना है कि इन दो दिनों में जिन नए इलाक़ों में बाढ़ पहुँची है वो पूर्णिया और कटिहार ज़िले के हैं. इसको मिलाकर अब राज्य में कोई 30 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं जिसमें से 20 लाख तो कोसी इलाक़े से ही हैं. बाढ़ का असर यह हुआ है कि यह नदी पूरे सवा सौ किलोमीटर में 12 से 15 किलोमीटर की चौड़ाई में बह रही है. बाढ़ को 12 दिन हो चुके हैं लेकिन इसकी स्थिति दिन प्रतिदिन ख़राब होती जा रही है. |
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