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भारत-नेपाल मिलकर बाढ़ का सामना करेंगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और नेपाल 'बिहार का शोक' कही जाने वाली कोसी नदी में 50 साल में आई सबसे भीषण बाढ़ से निपटने के लिए संयुक्त तौर पर काम करेंगे. पिछले लगभग दस दिन से बिहार में बाढ़ काप्रकोप जारी है और अब भी हज़ारों लोग पानी के बीच फँसे हुए हैं जबकि लाखों अन्य लोग इससे विस्थापित हुए हैं. कोसी नदी नेपाल से शुरु होती है, जहाँ उसे सप्तकोशी कहा जाता है. नेपाल में भी हज़ारों लोग बाढ़ का कहर झेल रहे हैं. नेपाल के वित्त मंत्री बाबूराम भट्टाराय का कहना है कि पूर्व नेपाल देश के अन्य हिस्सों से कट गया है. ख़राब मौसम के कारण बचाव और राहत कार्यों में ख़ासी दिक्कत आ रही है और सैकड़ों गाँव बाढ़ के पानी की चपेट में हैं. उधर भारत के प्रधानमंत्री इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर चुके हैं और उन्होंने प्रभावित क्षेत्र के लोगों को राहत पहुँचाने के लिए 1000 करोड़ के पैकेज की घोषणा की है. मौसम विभाग की चेतावनी कोसी नदी का तटबंध टूटने के बाद आई इस बाढ़ ने भारत के बिहार राज्य के 15 ज़िलों को अपनी चपेट में ले लिया है और इससे 25 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं. लेकिन चार ज़िलों, सुपौल, सहरसा, अररिया और मधेपुरा में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर है. सेना की मदद से प्रशासन लोगों को बचाने और राहत पहुँचाने में लगा हुआ है और अब तक एक लाख 24 हज़ार लोगों को बाढ़ के बीच से निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया जा चुका है. लेकिन मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में भारी बारिश की चेतावनी दी है और इससे प्रशासन और परेशान हो गया है. गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दूसरे नेताओं लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान के साथ बाढ़ प्रभावित ज़िलों का हवाई दौरा किया था. इसके बाद प्रधानमंत्री ने 1.25 लाख टन अनाज की सहायता देने की घोषणा की थी. उन्होंने आश्वासन दिया है कि इसके बाद जो भी मदद बाढ़ पीड़ितों के लिए आवश्यक होगी, दी जाएगी.
लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी याद में ऐसी भयंकर बाढ़ नहीं देखी है. माना जा रहा है कि कोसी नदी ने अपनी धारा बदल ली है और अब वह उस रास्ते से बह रही है जहाँ से दो सौ साल पहले बहा करती थी और इसी के कारण बाढ़ उन इलाक़ों तक पहुँच गई है जहाँ पहले बाढ़ नहीं आती थी. राहत और सहायता प्रशासन का कहना है कि इस बाढ़ से अब तक 55 लोगों की जानें जा चुकी हैं लेकिन लोगों का कहना है कि मरने वालों की संख्या इससे बहुत अधिक हो सकती है. प्रशासन ने 396 मोटर बोट और नावों से लोगों को बचाने का काम जारी रखा हुआ है लेकिन मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार ने और बोट मंगवा ली हैं और जल्दी ही 700 बोट और नावें लोगों को बचाने में लगा दी जाएँगीं. राज्य सरकार के अनुसार बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित चार ज़िलों में अब तक 65 हज़ार से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है और सभी 15 ज़िलों में एक लाख 24 हज़ार लोग बचाए जा चुके हैं. फ़िलहाल प्रशासन तीन हेलिकॉप्टरों की मदद से बाढ़ में फँसे हुए लोगों के लिए खाद्यान्न सामग्री गिराने के काम में लगा हुआ है. लेकिन केंद्र सरकार ने अधिक क्षमता वाले बड़े हेलिकॉप्टर देने का आश्वासन भी दिया है. मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा है कि वे सुरक्षा को लेकर कोई समझौता न करें. समचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने मधेपुरा के लोगों से गुरुवार को कहा कि अगले दो दिनों में वे सुरक्षित स्थानों पर चले जाएँ. गत 18 अगस्त को नेपाल सीमा के पास कोसी नदी का तटबंध टूटने के कारण यह बाढ़ आई है. अधिकारियों का कहना है कि कोसी नदी ने अपना रास्ता बदल दिया है और अब वह उस मार्ग से बह रही है जहाँ दो सौ साल पहले बहा करती थी. इसी के कारण बाढ़ उन इलाक़ों में पहुँच गई है जहाँ पिछले कई सालों में बाढ़ नहीं आई. |
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