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'प्राथमिकता शांति,सदभावना बहाल रखना' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अहमदाबाद में हुए धमाकों के बाद भारत के कई प्रमुख शहरों में उच्च स्तर की सतर्कता बरती जा रही है. शनिवार शाम को हुए इन धमाकों में कम से कम 49 लोगों की मौत हो गई है. रविवार को भी अहमदाबाद में दो बमों को निष्क्रिय किया गया. जबकि गुजरात के सूरत शहर में भी दो बम मिले जिन्हें बाद में निष्क्रिय कर दिया गया. सूरत में विस्फोटकों से भरी एक कार भी मिली है. नई दिल्ली में अहमदाबाद की स्थिति पर एक उच्च स्तरीय सुरक्षा मामलों की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने की. बैठक के बाद उन्होंने कहा कि अब प्राथमिकता गुजरात में जनजीवन सामान्य करने की है. शिवराज पाटिल ने कहा, "इस समय सबसे अहम चीज़ ये है कि गुजरात में शांति और सदभावना बहाल रहे. राज्य सरकार भी इसके लिए क़दम उठा रही है." बैठक के बाद गृह मंत्री शिवराज पाटिल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिले और उन्हें जानकारी दी. माना जा रहा है कि सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अहमदाबाद का दौरा कर सकते हैं.
गृह मंत्रालय का कहना है कि गुजरात सरकार को सभी सहायता दी जाएगी. शिवराज पाटिल के घर पर हुई इस बैठक में कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर, गृह सचिव मधुकर गुप्ता, ख़ुफ़िया ब्यूरो के निदेशक पीसी हलदर, दिल्ली पुलिस प्रमुख वाईएस डडवाल के साथ-साथ गृह मंत्रालय और ख़ुफ़िया एजेंसियों के अधिकारी भी मौजूद थे. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने लोगों से शांति की अपील की है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हमलों की निंदा करते हुए कहा है कि लोग शांति और सांप्रदायिक सदभाव बनाए रखे. राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने मारे गए लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की है. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हमलों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि दोषियों को नहीं छोड़ा जाएगा. उन्होंने कहा, "गांधी की धरती को चरमपंथियों ने लाल किया है. हम उन्हें नहीं छोड़ेंगे. आतंकवादी भारत के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़े हुए हैं. हमें आतंकवाद के ख़िलाफ़ लंबी लड़ाई की तैयारी करनी चाहिए." वर्ष 2002 में गुजरात में दंगे हुए थे और अहमदाबाद भी इसकी चपेट में आया था. उस समय यहाँ सैकड़ों लोग मारे गए थे. राज्य की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए रविवार को मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में कैबिनेट की विशेष बैठक हुई. बैठक के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री जयनारायण व्यास ने पत्रकारों को मरने वालों की संख्या के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया, "धमाकों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है और 145 लोग घायल हुए हैं. गुजरात में हुए हमले को अलग करने नहीं देखा जा सकता. राजस्थान, बंगलौर और अन्य जगहों पर भी ऐसे हमले हुए हैं. ये देश के ख़िलाफ़ साज़िश है." स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में धमाकों के बाद की स्थिति की समीक्षा की गई. उन्होंने बताया कि राज्य की पुलिस अन्य राज्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि धमाकों में शामिल लोगों को पकड़ा जा सके. उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार धमाकों में शामिल लोगों को पकड़ने में सफल रहेगी. लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के बिना सरकार किसी भी संगठन का नाम नहीं लेगी. सुरक्षा कड़ी अहमदाबाद में हुए धमाकों के एक दिन पहले कर्नाटक की राजधानी बंगलौर में भी धमाके हुए थे. सरकार ने देश के कई प्रमुख शहरों में सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है.
मुंबई, दिल्ली और जयपुर में विशेष सुरक्षा बरतने की सलाह दी गई है. शनिवार शाम को अहमदाबाद में हुए धमाकों में टाइमर का इस्तेमाल किया गया. अधिकारियों के मुताबिक़ पहला धमाका शाम साढ़े छह बजे हुए और इसके 36 मिनट के अंदर 16 और धमाके हुए. देर रात एक बम को निष्क्रिय भी कर दिया. बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक़ लगता यही है कि सभी धमाकों की योजना साथ ही बनी थी. धमाकों में अस्पतालों को भी निशाना बनाया गया. जहाँ घायलों का इलाज चल रहा था. अहमदाबाद पहुँचे बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद का कहना है कि एक अस्पताल के हॉल में एक साथ 60 लोगों का इलाज चल रहा है और इनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है. उनरा कहना है कि अहमदाबाद में भय का माहौल व्याप्त है और लोगों को आशंका है कि कहीं और हमले ना हो जाएँ. धर-पकड़ अधिकारियों ने अहमदाबाद धमाकों के सिलसिले में 30 लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.
अहमदाबाद धमाकों से कुछ मिनट पहले एक अनजाने से संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने कई भारतीय समाचार चैनलों को ईमेल करके हमलों के बारे में बताया था और ज़िम्मेदारी भी ली थी. ईमेल में लिखा है- अल्लाह के नाम पर इंडियन मुजाहिदीन फिर हमला कर रहा है. जो भी कर सकते हो करो. अभी से पाँच मिनट बाद मौत का आतंक महसूस करो. ईमेल के विषय वाले बॉक्स में लिखा है- गुजरात के बदले के लिए पाँच मिनट इंतज़ार करो. वर्ष 2002 में गोधरा ट्रेन कांड के बाद सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे. जिनमें हज़ारों लोग मारे गए थे. मई से पहले इंडियन मुजाहिदीन नाम के किसी संगठन के बारे में जानकारी नहीं थी. लेकिन जयपुर धमाकों की ज़िम्मेदारी भी इसी संगठन ने ली थी. उस धमाके में 60 से अधिक लोग मारे गए थे. शनिवार को भारतीय टीवी चैनलों को भेजा गया ईमेल याहू के अकाउंट से भेजा गया है और अंग्रेज़ी में लिखा गया है. हालाँकि उस ईमेल में एक दिन पहले बंगलौर में हुए धमाकों का ज़िक्र नहीं है. नज़ारा अहमदाबाद में हुए धमाकों के बाद घायल हुए क़रीब 150 लोगों का इलाज शहर के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है. शहर के कई अस्पतालों में घायलों के रिश्तेदारों की भीड़ लगी हुई है.
घायलों में एक छह साल का बच्चा भी है, जिसके पिता की धमाके में मौत हो गई है. घायलों की संख्या और कई लोगों की गंभीर स्थिति के कारण पुलिस को आशंका है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है. राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अस्पतालों का दौरा किया और घायलों के परिजनों को सांत्वना दी. सबसे ज़्यादा ख़राब स्थिति अस्पतालों के मुर्दाघर के बाहर की है. यहाँ मारे गए लोगों के परिजन इकट्ठा हैं और ग़मगीन माहौल है. रिश्तेदार फूट-फूट कर रो रहे हैं और कई लोग एक-दूसरे को सांत्वना दे रहे हैं. इस बीच रविवार की सुबह पुलिस ने एक और बम को निष्क्रिय किया. शहर के पुलिस आयुक्त ओपी माथुर ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने यह भी बताया कि 30 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. निंदा अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार धमाकों की कड़ी निंदा की जा रही है. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के अलावा सभी राजनीतिक दलों ने एक सुर में इस हमले की आलोचना की है.
देश के कई हिस्सों में आतंकवाद के ख़िलाफ़ लोग सड़क पर उतरे और हमलों के ज़िम्मेदार लोगों को जल्द पकड़ने की मांग भी की. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गीलानी ने भी अहमदाबाद धमाकों की आलोचना की है. उन्होंने इसे निर्दोष लोगों पर हमला बताया है. उन्होंने मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना भी प्रकट की है. यूरोपीय संघ ने भी इन हमलों की आलोचना की है. संघ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यूरोपीय संघ इन हमलों की निंदा करता है और ऐसे हमलों के ख़िलाफ़ जंग में भारत के साथ है. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने भी अहमदाबाद हमलों की आलोचना की है. राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से बयान में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान इसे 'आतंकवादी कार्रवाई' मानता है जिसका मक़सद क्षेत्र को अस्थिर करना है. |
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