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संघीय जाँच एजेंसी बनाने पर विचार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र सरकार अमरीकी ख़ुफिया एजेंसी की तर्ज़ पर संघीय जाँच एजेंसी बनाने पर विचार कर रही है. सरकार इस बारे में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर रही है. हालांकि इस पर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की सहमति नहीं मिल पाई है. सरकार को ऐसा कोई क़दम उठाने के लिए नया क़ानून तो नहीं बनाना पड़ेगा लेकिन मौज़ूदा क़ानून में संशोधन करना होगा. ऐसा माना जा रहा है कि संघीय जाँच एजेंसी राज्यों में होने वाले चरमपंथी हमलों से जुड़े मामलों की जाँच कर सकेगी जिससे जाँच अलग अलग स्तर पर प्रभावित न हो. अगर यह संस्था वजूद में आती है तो इसे किसी राज्य में हुई किसी विस्फ़ोट या कोई और घटना की जाँच करने के लिए उस राज्य की सहमति की ज़रूरत नहीं होगी. लेकिन राज्य सरकारों और केंद्र के बीच विश्वास की कमी की वजह से राज्य सरकारें इस कानून को शक की निगाह से देखती हैं. विरोध इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व निदेशक अरुण भगत कहते हैं कि केंद्रीय एजेंसी जैसे सीबीआई पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि उसका दुरुपयोग किया जा रहा है. इस वजह से राज्य सरकारें ऐसे कदमों का विरोध करती हैं. उधर रविवार सुबह से ही दिल्ली में बैठकों का दौर जारी रहा. सुबह केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई. इस बैठक में कैबिनेट सचिव के एम चंद्रशेखर, गृह सचिव मधुकर गुप्ता, ख़ुफ़िया ब्यूरो प्रमुख पीसी हलदर, दिल्ली पुलिस प्रमुख वाईएस डडवाल और अन्य सुरक्षा अधिकारियों ने भाग लिया. इस बैठक में गुजरात सरकार की भेजी हुई सूचनाओं पर विचार किया गया और आगे लिए जाने वाले क़दमों पर बातचीत हुई. इस हफ़्ते हुई ऐसी ये दूसरी बैठक थी. जानकारी इस बैठक के बाद शिवराज पाटिल कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर और गृह सचिव मधुकर गुप्ता के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के घर गए और उन्हें स्थिति के बारे में जानकारी दी.
सरकार गुजरात की स्थिति पर बहुत संभल कर बोल रही है. गुजरात में नाज़ुक सांप्रदायिक माहौल और 2002 के दंगों के मद्देनज़र सरकार की तरफ़ से कहा जा रहा है कि वो ऐसी कोई बात नहीं करेंगे जिससे गुजरात सरकार पर कोई आरोप लगें और वहाँ स्थिति बिगड़े. शिवराज पाटिल कह रहे हैं कि जो लोग ऐसे हादसों के लिए केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हैं वो संविधान को नहीं समझते क्योंकि क़ानून व्यवस्था की ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों की है. लेकिन राज्य केंद्र को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. किसकी कितनी ज़िम्मेदारी है, बहस जारी है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'प्राथमिकता शांति और सदभावना बहाल रखना'27 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 17 धमाकों से दहला अहमदाबाद, 45 मौतें27 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस धमाकों के सिलसिले में मुंबई में छापे27 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'इंडियन मुजाहिदीन ने ज़िम्मेदारी ली'27 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस पाँच साल में भारत के बड़े धमाके26 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस दहला देने वाले सच के साक्षी26 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'जनता को विचलित करने की कोशिश'26 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस धमाकों के बाद आरोप-प्रत्यारोप शुरू26 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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