|
दहला देने वाले सच के साक्षी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात का प्रमुख शहर अहमदाबाद शनिवार शाम एक के बाद एक हुए 16 बम धमाकों से दहल गया. दो धमाके अहमदाबाद के बापूनगर स्थित धनवंतरि अस्पताल के पास भी हुए. धनवंतरि अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर हितेश रामानुज ने बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा को बताया कि शाम साढ़े सात बजे के आसपास वह अपने अस्पताल की ऊपरी मंज़िल पर थे. अस्पताल के कुछ कर्मचारी और डॉक्टर नीचे थे. उन्होंने देखा कि वहाँ एक लावारिस बैग पड़ा हुआ है. उन लोगों को कुछ देर पहले ही ख़बर मिली थी कि अस्पताल से कुछ दूरी पर एक धमाका हुआ है. इसलिए उन्होंने सुरक्षा के लिए बैग को वहाँ से हटाकर अस्पताल से बाहर रख दिया. कुछ देर बाद ही बैग में धमाका हो गया. जिसमें कोई घायल नहीं हुआ. डॉक्टर रामानुज ने बताया कि कुछ देर बाद अस्पताल से कुछ दूर पर हुए धमाके के घायलों को इलाज़ के लिए उनके अस्पताल लाया जाने लगा. धमाके में 40-50 लोग घायल हुए थे. कुछ घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद सिविल अस्पताल भेज दिया गया और कम घायल लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया. अस्पताल में सात लाशें भी लाई गई थीं, जिन्हें पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया गया. उन्होंने बताया कि अस्पताल की एक एंबुलेंस और कुछ स्टाफ़ को सहायता के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया. जब वे लोग वहाँ पहुँचे तो, जहाँ एंबुलेंस खड़ी थी वहाँ भी एक धमाका हुआ. इस धमाके में एंबुलेंस का ड्राइवर और एक कर्मचारी घायल हो गया और एंबुलेंस के शीशे टूट गए. संगम सिनेमा अहमदाबाद के संगम सिनेमा के पास भी एक धमाका हुआ. उस समय वहाँ मौज़ूद जोहापुरा के पूर्व सरपंच असरार बेग़ मौज़ूद थे. बेग़ ने बीबीसी संवाददाता नादिया परवेज़ को बताया कि 150 नंबर की बस सरकेत जा रही थी, जिसमें धमाका हुआ. जब वह वहाँ पहुँचे तो देखा कि लोग बस में से घायल लोगों को निकालकर 108 के ज़रिए अस्पताल भेज रहे थे. उन्होंने बताया कि इस धमाके में कम से कम 15 लोग घायल हुए थे. असरार बेग़ ने बताया कि बस के ड्राइवर को चोट नहीं आई थी. धमाका ड्राइवर की सीट के तीन सीट पीछे हुआ था. बस में सवार लोगों को पहले तो लगा कि बस के सीएनजी की टंकी फटी है, लेकिन जब उसकी जाँच की गई तो वह सही-सलामत थी. लोगों को बाद में पता चला कि पता चला कि शहर में अन्य जगहों पर भी धमाके हुए हैं. ट्रामा सेंटर की पार्किंग अंग्रेजी अख़बार डीएनए के फ़ोटोग्राफ़र पीयूष पटेल धमाके की ख़बर पाकर घायलों की फोटो लेने साढ़े सात बजे के आसपास सिविल अस्पताल पहुँचे. उन्होने बीबीसी के मोहनलाल शर्मा को बताया कि जब वे अस्पताल पहुँचे तो वहाँ उन्हें सब कुछ सामान्य मिला. जिसके बाद वह ट्रामा सेंटर जाने लगे. जब वह रास्ते में ही थे कि उन्हें धमाके की आवाज़ सुनाई दी जो ट्रामा सेंटर के पीछे स्थित पार्किंग से आई थी. जब वह वहाँ पहुँचे तो देखा कि पाँच-सात घायल तड़प रहे थे और कुछ गाड़ियाँ जल रही थी. जब वह अपनी गाड़ी को पार्क में लगाकर जाने लगे तभी उन्हें एक दूसरे धमाके की आवाज़ सुनाई दी. पीयूष जब वहाँ पहुँचे तो देखा कि वहाँ भी गाड़ियाँ जल रही हैं और घायल तड़प रहे थे. उस समय वहाँ मोबाइल फ़ोन के नेटवर्क काम नहीं कर रहे थे. जिससे लोग पुलिस और फ़ायर ब्रिगेड को फ़ोन नहीं कर पा रहे थे. लोग ख़ुद ही अपनी बाल्टियों में पानी लाकर आग बुझा रहे थे. वहाँ 10 मिनट में ही दो धमाके हुए थे. इसलिए लोगों को डर था कि कहीं और धमाके न हो जाएँ. इसलिए लोग घायलों की मदद नहीं कर पा रहे थे. कुछ देर बाद वहाँ पुलिस पहुँची और अस्पताल के डॉक्टर और अन्य स्टाफ़ भी. उन लोगों ने घायलों को ट्रामा सेंटर पहुँचाया और इलाज़ शुरू किया. पीयूष पटेल ने बताया कि जहाँ धमाके हुए वहाँ गैस के दो-तीन छोटे सिलेंडर फटे हुए मिले और कुछ साइकिलें और स्कूटर भी जले पड़े थे. | इससे जुड़ी ख़बरें बच्चों की मौत के ख़िलाफ़ बंद18 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस अहमदाबाद में 16 धमाकों में 29 मारे गए, कई घायल26 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस पाँच साल में भारत के बड़े धमाके26 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस धमाकों के बाद आरोप-प्रत्यारोप शुरू26 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'जनता को विचलित करने की कोशिश'26 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||