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रविवार, 27 जुलाई, 2008 को 03:44 GMT तक के समाचार
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'इंडियन मुजाहिदीन ने ज़िम्मेदारी ली'
अख़बारों की सुर्ख़ियाँ

भारत से प्रकाशित होने वाले हर अख़बार की सुर्ख़ियाँ अहमदाबाद धमाकों के इर्द-गिर्द घूम रही हैं.

इन धमाकों में 38 लोग मारे गए हैं और सौ से ज़्यादा घायल हुए हैं.

धमाकों की सख्या और मृतकों की संख्या गणित में फ़र्क देखा जा सकता है लेकिन सभी अख़बारों ने बंगलौर के ठीक एक दिन बाद देश के पश्चिमी हिस्से में हुए सिलसिलेवार धमाकों पर चिंता व्यक्त की है.

हिंदी दैनिक अमर उजाला की बैनर हेडलाइन है- 'इस बार अहमदाबाद' और इसके ठीक नीचे लिखा है - 70 मिनट, 16 धमाके, 29 मौतें, 100 घायल, 14 इलाक़े.

इससे ये समझा जा सकता है कि धमाकों का दायरा कितना व्यापक है. अख़बार की एक और रिपोर्ट के मुताबिक धमाकों की ज़िम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन नामक संगठन ने ली है.

 याहू की वेबसाइट पर अलअरबीगुजरात के नाम के नए मेल एकाउंट से भेजे गए संदेश में इंडियन मुजाहिदीन ने शनिवार को अहमदाबाद में हुए सीरियल बम धमाकों की ज़िम्मेदारी ली है.

इसमें लिखा है, "याहू की वेबसाइट पर अलअरबीगुजरात के नाम के नए मेल एकाउंट से भेजे गए संदेश में इंडियन मुजाहिदीन ने शनिवार को अहमदाबाद में हुए सीरियल बम धमाकों की ज़िम्मेदारी ली है. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस मेल आईडी को शनिवार दोपहर में ही तैयार किया गया था. इंडियन मुजाहिदीन के बैनर तले बने इस ई-मेल अकाउंट की जाँच से जाहिर होता है कि इस संगठन को भारत में सक्रिय सिमी और लश्करे तैयबा की मदद हासिल है."

चुनौती

नवभारत टाइम्स ने क्षतिग्रस्त साइकल की तस्वीर छापी है जिस पर बम रखा हुआ था. इसकी एक रिपोर्ट के अनुसार यूपी से गुजरात तक बम धमाकों का पैटर्न एक जैसा है.

अख़बार लिखता है, "बम धमाके करने वालों के संगठन का नाम महत्वपूर्ण नहीं है. महत्वपूर्ण यह है कि बार-बार भारत की राज्यसत्ता को चुनौती दी जा रही है."

बम विस्फोट के बाद एक कार में लगी आग की तस्वीर प्रमुखता से छापते हुए दैनिक हिंदुस्तान ने शीर्षक लगाया है- 'अब अहमदाबाद'. इस अख़बार ने मरने वालों की संख्या 35 बताई है और लिखा है कि ब्लास्ट जयपुर से मिलते-जुलते हैं और इनमें अमोनियम नाइट्रेट और साइकल का प्रयोग
किया गया है.

धमाकों में 38 लोग मारे गए हैं और सौ से ज़्यादा घायल हुए.

दैनिक जनसत्ता के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने देश भर में सुरक्षा हालात की समीक्षा के लिए रविवार को एक उच्चसत्तरीय बैठक बुलाई है और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के जवानों को अहमदाबाद रवाना कर दिया गया है.

'ख़ौफ़ का माहौल'

दैनिक जागरण ने लिखा है, "अभी बीते शुक्रवार को बेंगलूर और फिर यहाँ हुए धमाकों से साफ है कि दहशतगर्दों की मंशा भाजपा शासित राज्यों में ख़ौफ़ का माहौल पैदा करने की है."

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक किसी एक शहर में इतने धमाके भारत में कभी नहीं हुए थे.

इसी अख़बार ने अहमदाबाद के दो अस्पतालों में हुए धमाकों को प्रमुखता दी है जिसमें एक युवा डॉक्टर और उनकी गर्भवती पत्नी की मौत हो गई.

हिंदुस्तान टाइम्स ने धमाकों की ख़बरों के बीच कुछ मीडिया संगठनों को मिले एक ई-मेल की ख़बर प्रमुखता से दी गई है जिसमें बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को उड़ाने की धमकी दी गई है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के रविवार के संस्करण संडे टाइम्स ने हेडलाइन के ज़रिए ही सवालिया लहज़े में पूछा है- बंगलौर, अहमदाबाद, ब्हू इज़ नेक्स्ट यानी आगे कौन?

इसकी रिपोर्ट के अनुसार अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटर में हुए धमाके इराक़ में अल क़ायदा की रणनीति से मेल खाते हैं. इसके मुताबिक शुरुआती जाँच से पता चलता है कि धमाकों में मुंबई के सिमी कार्यकर्ताओं का हाथ है क्योंकि जिस कंप्यूटर से संदिग्ध ई-मेल भेजा गया है उसका पता मुंबई का है.

अहमदाबाद में दहशतअहमदाबाद में दहशत
अहमदाबाद में शनिवार को हुए बम विस्फोटों पर बीबीसी की विशेष प्रस्तुति...
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