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विश्वास मत को लेकर अनिश्चितता बरक़रार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मनमोहन सिंह के नेतृत्ववाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के 22 जुलाई को विश्वास मत को लेकर छोटी पार्टियों ने अब भी अनिश्चितता बनाए रखी है. विश्वास मत में एक सप्ताह का समय रह गया है और शिबू सोरेन के झारखंड मुक्ति मोर्चा, एसडी देवगौड़ा के जनता दल (एस) और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. मंगलवार को अकाली दल ने स्पष्ट कर दिया कि वे विश्वास मत का विरोध करेंगे, उनके समर्थन को भी लेकर अटकलें लगाईं जा रहीं थीं. वैसे तो झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) यूपीए का सहयोगी है लेकिन उन्होंने घोषणा की है कि वे 19 जुलाई को संसदीय दल की बैठक में इस बारे में फ़ैसला करेंगे. ख़बरें हैं कि झामुमो नेता शिबू सोरेन दोबारा केंद्र में मंत्री न बनाए जाने को लेकर नाराज़ हैं. गुरुजी के नाम से जाने जानेवाले शिबू सोरेन ने मीडिया से बातचीत में अब तक ये संकेत नहीं दिए हैं कि उनकी पार्टी क्या फ़ैसला कर सकती है.
ग़ौरतलब है कि झामुमो के पाँच सांसद हैं. रुख़ अस्पष्ट पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के जनता दल (एस) ने भी इस मामले में अभी तक अपना रुख़ स्पष्ट नहीं किया है. उनकी पार्टी के लोकसभा में तीन सदस्य हैं. जनता दल (एस) के एक सांसद ने तो साफ़ कह दिया है कि वो सरकार के ख़िलाफ़ वोट डालेंगे. पार्टी प्रमुख देवगौड़ा धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एक साथ लाने की बात कह रहे हैं लेकिन प्रेक्षकों का कहना है कि 22 जुलाई को ही पता चलेगा कि वो क्या करनेवाले हैं.
यही हाल तीन सांसदों वाले अजित सिंह के राष्ट्रीय लोक दल का है. अजित सिंह ने हालांकि परमाणु समझौते को राष्ट्र हित में बताकर कांग्रेसियों को उम्मीद तो बंधा दी है. लेकिन साथ ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि इस बारे में अंतिम फ़ैसला नहीं किया गया है. इधर तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने सरकार के ख़िलाफ़ मतदान करने की घोषणा कर दी थी. लेकिन टीआरएस नेता चंद्रशेखर राव ने कहा है कि यदि प्रधानमंत्री अलग तेलंगाना राज्य की मांग स्वीकार करते हैं तो पार्टी सरकार को समर्थन देने पर विचार कर सकती है. इधर वामपंथियों ने बहुजन समाज पार्टी को अपने पक्ष में खींच कर सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. लोक सभा में बसपा के 17 सदस्य हैं. |
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